बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हिजाब उतारकर एक महिला की पहचान किए जाने को लेकर उठा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर मामले के मुख्य याचिकाकर्ता और श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने एक बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि एक शासक का यह कर्तव्य होता है कि वह अपनी प्रजा की पहचान सुनिश्चित करे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहचान करने के उद्देश्य से हिजाब उतारने में कोई बुराई नहीं है। उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर पहचान छुपाकर समाज में निंदनीय गतिविधियों को अंजाम देते हैं और ऐसे मामलों में सख्ती से पहचान करना आवश्यक हो जाता है।
फलाहारी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हिजाब हटाकर उन लोगों को एक संदेश दिया है, जो पहचान छुपाकर गलत गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं। उन्होंने इसे साहसिक कदम बताते हुए कहा कि इससे ऐसे तत्वों को चेतावनी मिली है, जो भेष बदलकर समाज को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस कार्य के लिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ब्रजभूमि आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा। फलाहारी महाराज ने कहा कि उन्हें श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया जाएगा और साथ ही पांच लाख रुपये की सम्मान राशि भी प्रदान की जाएगी। फलाहारी महाराज ने दावा किया कि इस कदम के लिए सनातन समाज के लोग मुख्यमंत्री की हिम्मत को प्रणाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने एक शासक के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है।
साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब पहचान छुपाकर समाज में गंभीर घटनाएं होती हैं, तब विपक्षी पार्टियां मौन रहती हैं, लेकिन इस मामले में अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए और समाज की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।