राहुल गुप्ता, पटियाली /कासगंज।
जनपद कासगंज की सहावर तहसील के गढ़का गांव सहित कई क्षेत्रों से मतदाता अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ असामाजिक व संगठित तत्व जानबूझकर फर्जी तरीके से फॉर्म नंबर 7 भरकर नागरिकों के नाम मतदाता सूची से कटवाने की साजिश कर रहे हैं। यह मामला लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों पर सीधा प्रहार बताया जा रहा है।
एडवोकेट एवं समाजसेवी अब्दुल हफीज गांधी ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि एक व्यक्ति के नाम पर दूसरा व्यक्ति फर्जी आपत्तियां दर्ज करा रहा है। जिन मतदाताओं के नाम से फॉर्म नंबर 7 भरे गए हैं, वे स्वयं यह कह रहे हैं कि उन्होंने कभी ऐसा कोई आवेदन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यह कोई प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि मतदाता सूची से नाम हटाने की सुनियोजित साजिश है। यदि इस फर्जी प्रक्रिया को समय रहते नहीं रोका गया, तो प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे जा सकते हैं, जिससे लोकतंत्र कमजोर होगा।
अब्दुल हफीज गांधी ने कासगंज जिला प्रशासन और भारत निर्वाचन आयोग से स्पष्ट मांग की है कि फर्जी फॉर्म नंबर 7 दाखिल करने वाले लोगों और संगठनों की तत्काल जांच कराई जाए। प्रत्येक आपत्ति पर सख्त पहचान सत्यापन (आईडी वेरिफिकेशन) अनिवार्य किया जाए तथा वास्तविक आवेदक की उपस्थिति के बिना कोई भी फॉर्म स्वीकार न किया जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने और बीएलओ, ईआरओ व संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
उन्होंने जनता से अपील की कि यदि किसी मतदाता के नाम पर बिना उसकी जानकारी के फॉर्म 7 भरा गया है, तो वह तुरंत बीएलओ, ईआरओ अथवा जिला निर्वाचन कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराए। किसी दूसरे के नाम से आपत्ति दर्ज कराना कानूनन अपराध है। मतदाताओं को अपने वोट का स्टेटस नियमित रूप से जांचते रहने और इस लोकतंत्र विरोधी साजिश के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की आवश्यकता है।
अब्दुल हफीज गांधी ने चेतावनी दी कि यदि यह संगठित फर्जीवाड़ा बंद नहीं हुआ, तो जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि हर नागरिक के वोट, अधिकार और संविधान की है।