अमरदीप रस्तोगी, शाहजहांपुर। मामला शहीदों की नगरी कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर का है। रोजा थाना क्षेत्र की आर्दश कॉलोनी में रहने वाले अर्जुन गुप्ता ने सोशल मीडिया पर एक पत्र पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने बेटी और बेटे की फीस भरने के लिए किडनी बेचने की पेशकश की है। अर्जुन ने बताया कि जब किसी ने मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाया तो उन्होंने यह फैसला किया है ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई जारी रह सके।
कोरोना में चौपट हुआ कारोबार
अर्जुन रोजा मंडी में एक आढ़त पर मुंशी थे। 2014 में उन्होंने रोजा मंडी में ही किराये पर दुकान लेकर अपना गल्ले का कारोबार शुरू किया था। कुछ समय तक सबकुछ ठीक चलता रहा था लेकिन कोरोना काल के दस्तक देने के बाद लॉकडाउन लगा तो कारोबार चौपट होता चला गया। बड़े व्यापारियों का कर्ज हो गया सो अलग। कर्ज उतारने और बच्चों की पढ़ाई जारी रख सके इसलिए अर्जुन दिल्ली चले गए और वहां कबाड़ का काम करने लगे लेकिन हालात नहीं सुधरे। दो साल दिल्ली में ठोकरे खाने के बाद वापस शाहजहांपुर आ गए और मजदूरी करने लगे लेकिन गरीबी ने उनका दामन नहीं छोड़ा।
फीस जमा न होने पर बेटे को स्कूल से निकाला
अर्जुन की बेटी एक डिग्री कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रही है, जबकि बेटा सीबीएसई के एक प्राइवेट स्कूल में 12वीं का छात्र। अर्जुन बताते हैं कि तंगहाली के कारण एक साल से बेटे की फीस जमा नहीं कर पाए हैं। फीस जमा न होने की वजह से बेटे को स्कूल से निकाल दिया गया है। जैसे-तैसे घर का खर्च चल रहा है। पत्नी रूई की बातियां बनाकर दुकानों पर बेचती है, उससे घर के छोटे मोटे खर्च ही निकल पाते हैं। प्राइवेट स्कूल की भारी भरकम फीस जमा कहां से करेंगे इसलिए किडनी बेचना चाहते हैं।