जागरण टुडे, बरेली
फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के सिविल लाइन्स स्थित घर पर हुई फायरिंग के आरोपियों तक पहुंचने के लिए बरेली पुलिस ने सी-ट्रेस ऐप का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस ऐप के उपयोग अधिकार 80 हजार रुपये में खरीदे थे और इसे पहली बार इस हाई-प्रोफाइल मामले में इस्तेमाल किया गया। ऐप की मदद से पुलिस ने शूटरों और गिरोह के नेटवर्क की पूरी कुंडली खंगाल डाली।
इस तरह हुआ पूरी घटना का खुलासा
11 और 12 सितंबर की भोर में बाइक सवार बदमाशों ने दिशा पाटनी के घर पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। वारदात के वक्त उनके पिता जगदीश पाटनी (रिटायर्ड सीओ), मां पद्मा पाटनी और बहन खुशबू पाटनी (रिटायर्ड मेजर) घर पर मौजूद थीं। घटना के बाद रोहित गोदारा और गोल्डी बरार गैंग ने जिम्मेदारी ली थी।
जांच में पुलिस को विजय नामक युवक का नंबर मिला, जिसने होटल में ठहरने के लिए फर्जी आधार कार्ड इस्तेमाल किया था। जब इस नंबर को सी-ट्रेस ऐप पर सर्च किया गया तो उसके मोबाइल में सेव सभी नंबर, नाम सहित सामने आ गए। यहां तक कि कौन सा नंबर कब लिया गया, किस कंपनी में पोर्ट हुआ, किस ई-वॉलेट या ई-कॉमर्स साइट पर इस्तेमाल हुआ—सारी जानकारी मिल गई।
ऐप से मिले डाटा के आधार पर बड़ी सफलता हाथ लगी
पुलिस ने ऐप से मिले डाटा के आधार पर एक-एक कर सभी शूटरों और मददगारों के नंबर ट्रेस किए। गिरोह के मुख्य शूटर रविंद्र और अरुण गाजियाबाद में एसटीएफ मुठभेड़ में ढेर कर दिए गए, जबकि दो अन्य को शाही थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी विजय के पुलिस को नौ अलग-अलग नाम मिले
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सी-ट्रेस ऐप खरीदने पर पहले 500 नंबर तक फ्री सर्च की सुविधा होती है। इसके बाद प्रति नंबर सर्च शुल्क 2000 रुपये देना होता है। विजय के मोबाइल नंबर से पुलिस को उसके नौ अलग-अलग नाम और सोशल मीडिया अकाउंट मिले, जिनके जरिए गिरोह का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।
फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के सिविल लाइन्स स्थित घर पर हुई फायरिंग के आरोपियों तक पहुंचने के लिए बरेली पुलिस ने सी-ट्रेस ऐप का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस ऐप के उपयोग अधिकार 80 हजार रुपये में खरीदे थे और इसे पहली बार इस हाई-प्रोफाइल मामले में इस्तेमाल किया गया। ऐप की मदद से पुलिस ने शूटरों और गिरोह के नेटवर्क की पूरी कुंडली खंगाल डाली।
इस तरह हुआ पूरी घटना का खुलासा
11 और 12 सितंबर की भोर में बाइक सवार बदमाशों ने दिशा पाटनी के घर पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। वारदात के वक्त उनके पिता जगदीश पाटनी (रिटायर्ड सीओ), मां पद्मा पाटनी और बहन खुशबू पाटनी (रिटायर्ड मेजर) घर पर मौजूद थीं। घटना के बाद रोहित गोदारा और गोल्डी बरार गैंग ने जिम्मेदारी ली थी।
जांच में पुलिस को विजय नामक युवक का नंबर मिला, जिसने होटल में ठहरने के लिए फर्जी आधार कार्ड इस्तेमाल किया था। जब इस नंबर को सी-ट्रेस ऐप पर सर्च किया गया तो उसके मोबाइल में सेव सभी नंबर, नाम सहित सामने आ गए। यहां तक कि कौन सा नंबर कब लिया गया, किस कंपनी में पोर्ट हुआ, किस ई-वॉलेट या ई-कॉमर्स साइट पर इस्तेमाल हुआ—सारी जानकारी मिल गई।
ऐप से मिले डाटा के आधार पर बड़ी सफलता हाथ लगी
पुलिस ने ऐप से मिले डाटा के आधार पर एक-एक कर सभी शूटरों और मददगारों के नंबर ट्रेस किए। गिरोह के मुख्य शूटर रविंद्र और अरुण गाजियाबाद में एसटीएफ मुठभेड़ में ढेर कर दिए गए, जबकि दो अन्य को शाही थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी विजय के पुलिस को नौ अलग-अलग नाम मिले
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सी-ट्रेस ऐप खरीदने पर पहले 500 नंबर तक फ्री सर्च की सुविधा होती है। इसके बाद प्रति नंबर सर्च शुल्क 2000 रुपये देना होता है। विजय के मोबाइल नंबर से पुलिस को उसके नौ अलग-अलग नाम और सोशल मीडिया अकाउंट मिले, जिनके जरिए गिरोह का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।