जागरण टुडे, बरेली। इत्तेहाद ए मिल्लत काउंसिल (IMC) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और बरेली बवाल के मुख्य आरोपी नफीस खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। वक्फ संपत्ति कब्जाने के मामले में दर्ज मुकदमे में पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर (फाइनल रिपोर्ट) को एसएसपी अनुराग आर्य ने खारिज कर दिया है। अब मामले की दोबारा विवेचना कराई जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, साजदा बेगम नाम की महिला ने नफीस खान के दो बेटे नोमान और फरहान सहित पांच लोगों के खिलाफ वक्फ संपत्ति पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाते हुए किला थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। जांच के बाद पुलिस ने आरोपों को निराधार मानते हुए एफआर लगा दी थी।
हालांकि, वादी साजदा बेगम ने गोपनीय हेल्पलाइन के माध्यम से एसएसपी बरेली से शिकायत की। एसएसपी ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच सीओ प्रथम को सौंपी। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि आरोप काफी हद तक सही पाए गए। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि पुलिस ने वक्फ बोर्ड के विधि सलाहकार के बयान दर्ज ही नहीं किए थे, जबकि एफआर लगाने में उनके कथित बयान का हवाला दिया गया था। इस गंभीर चूक पर एसएसपी अनुराग आर्य ने फाइनल रिपोर्ट खारिज करते हुए मामले की दोबारा विवेचना के आदेश दे दिए हैं।
दोबारा जांच शुरू होने से नफीस खान और उनके बेटों की परेशानी और बढ़ सकती है। बता दें कि 26 सितंबर को हुए बरेली बवाल के बाद से ही नफीस खान और उसके दोनों बेटे जेल में बंद हैं। प्रशासन ने उस बवाल के बाद कार्रवाई करते हुए नफीस का अवैध बारातघर ध्वस्त कराया था और उसकी दुकानों को सील कर दिया था।
इससे पहले नफीस खान का एक धमकी भरा वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह खुलेआम किला थाना इंस्पेक्टर को धमकी देते हुए कहता नजर आया था—“अगर किसी ने ‘आई लव मोहम्मद’ बैनर पर हाथ लगाया तो मैं उसका हाथ काट दूंगा, वर्दी नहीं बचेगी।” इस वीडियो के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी। अब वक्फ संपत्ति कब्जा प्रकरण में फिर से जांच शुरू होने से नफीस खान और उसके बेटों की कानूनी मुश्किलें और गहराने के आसार हैं।