जनपद मथुरा में बालश्रम उन्मूलन को लेकर प्रशासन ने सोमवार को सख्त कार्रवाई की। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और मुख्य विकास अधिकारी मनीष मीना के निर्देशन पर सहायक श्रमायुक्त एम.एल. पाल के नेतृत्व में 08 दिसंबर 2025 को छटीकरा, जैत, अकबरपुर और छाता बाजार—दिल्ली-आगरा हाईवे के आसपास व्यापक बालश्रम विरोधी अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान निरीक्षण टीम ने कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। जांच में 7 प्रतिष्ठानों से कुल 9 किशोर काम करते हुए पाए गए, जिन्हें नियमों के अनुसार गैर-खतरनाक प्रक्रिया के अंतर्गत चिन्हांकित किया गया। मौके पर ही संबंधित सेवायोजकों को नोटिस थमाया गया और चेतावनी दी गई कि भविष्य में नाबालिगों से कार्य करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण टीम में श्रम प्रवर्तन अधिकारी प्रकाश चंद, एएचटीयू प्रभारी एसआई राजुल कुमार, हेड कांस्टेबल योगेश व जीतेंद्र कुमार, एसजेपीयू टीम तथा चाइल्ड लाइन कर्मी शामिल रहे। टीम ने प्रतिष्ठान संचालकों को बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम कराना गैरकानूनी है, जबकि किशोरों (14–18 वर्ष) को खतरनाक उद्योगों में कार्य करवाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून उल्लंघन करने पर सेवायोजक पर 10,000 रुपये तक जुर्माना, तीन माह तक कारावास या दोनों दंड लागू हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर दुकानदारों और मालिकों ने कार्रवाई का प्रतिरोध भी किया, जिस पर अधिकारियों ने उन्हें अधिनियम की धाराओं और दंड प्रावधानों से अवगत कराते हुए भविष्य में नाबालिगों का नियोजन न करने की सख्त चेतावनी दी।
अधिकारियों ने बताया कि बालश्रम न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे बच्चों का भविष्य और शिक्षा दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए जिले में आगे भी इसी प्रकार के औचक अभियान लगातार चलाए जाएंगे।