वंदे मातरम को लेकर देशव्यापी बहस के बीच साधू-संत समाज से एक कड़ा बयान सामने आया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम नहीं बोलने वालों के खिलाफ कठोर कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दे पर सरकार को निर्णायक रुख अपनाना चाहिए।
फलाहारी महाराज के अनुसार, “हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म या संप्रदाय का हो, यदि वह वंदे मातरम नहीं बोलता, तो उसके मन में राष्ट्र-प्रेम की भावना संदिग्ध है। ऐसे लोग राष्ट्रद्रोह की प्रवृत्ति रखते हैं और देश से गद्दारी कर सकते हैं।” महाराज ने मांग की है कि ऐसे मामलों में देश निकाला या फांसी जैसी कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए।
अपने पत्र में उन्होंने तर्क दिया कि कई देशों जैसे चीन, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सख्त कानून हैं। पाकिस्तान का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी कौमी तराना न गाने वालों पर कार्रवाई की जाती है। महाराज ने आरोप लगाया कि पूर्व सरकारों ने “लचीले और तुष्टिकरण वाले कानून” बनाए, जिनकी वजह से देश-विरोधी तत्वों को बढ़ावा मिला।
उन्होंने दावा किया कि “वंदे मातरम वही बोल सकता है जिसके दिल में हिंदुस्तान बसता है। जिनके मन में पाकिस्तान की विचारधारा है, वे इसे बोलने से बचते हैं।” पत्र में उन्होंने अवैध घुसपैठियों, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी समर्थकों को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि ऐसे लोग राष्ट्रहित के लिए खतरनाक हैं।
फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री को “हिंदुओं का हृदय सम्राट” बताते हुए कहा कि सनातन मूल्यों पर आधारित भारत के निर्माण के लिए कठोर कानून जरूरी हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तीन वर्ष पूर्व उन्होंने संकल्प लिया था कि मथुरा विवादित संरचना हटने तक वे अन्न और जूते-चप्पल त्यागकर कठिन तपस्या करेंगे और आज भी उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा है।