जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी का 2902वां जन्म कल्याणक जैन समाज द्वारा पूरे श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। पौष कृष्ण एकादशी की पावन तिथि पर दो महान तीर्थंकरों भगवान चंद्रप्रभु जी एवं भगवान पार्श्वनाथ जी के जन्म व तप कल्याणक का संयोग होने से धार्मिक कार्यक्रमों का विशेष महत्व रहा।
सोमवार सुबह जैन मंदिर रामपुर गार्डन में 1200 वर्ष प्राचीन, भूगर्भ से प्राप्त भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा का स्वर्ण कलश एवं स्वर्ण झारी से अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने शांति धारा के साथ कल्याण मंदिर विधान में सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया। वहीं, बिहारीपुर जैन मंदिर में भी इस शुभ अवसर पर श्री पार्श्वनाथ विधान का आयोजन किया गया।
48 दीपों की भव्य आरती के उपरांत बिहारीपुर जैन मंदिर से भजनों की मधुर धुनों के साथ पालकी यात्रा निकाली गई। सौधर्म इंद्र बने अनुयायियों ने अपने साथी इंद्रों संग भगवान पार्श्वनाथ जी की पालकी को पांडु शीला तक ले जाकर अभिषेक किया। पालकी यात्रा मंदिर से प्रारंभ होकर कुतुबखाने चौराहा, सब्जी मंडी, सिटी पोस्ट ऑफिस, चौपला रोड होते हुए पुनः मंदिर पर सम्पन्न हुई।
पालकी यात्रा में पीत वस्त्र धारण किए महिलाएं कलश लेकर चल रही थीं। भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा, वहीं भजनों की धुनों पर थिरकते श्रद्धालु भगवान की आराधना में लीन नजर आए। महिलाओं ने “जरा हल्का झोटा दीजो” जैसे भजनों के माध्यम से भगवान के प्रतिरूप को झूला भी झुलाया।
मीडिया प्रभारी सौरभ जैन ने सरकार से मांग की कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में राजघाट, आशापुर व अन्य स्थानों से प्राप्त जैन तीर्थंकरों की प्राचीन प्रतिमाओं एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण हेतु एक भव्य संग्रहालय का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जैन संस्कृति के साथ भारतीय सभ्यता की प्राचीन विरासत से परिचित हो सकेंगे। इस मांग को लेकर विश्व जैन संगठन निरंतर संघर्षरत है।
उपमंत्री राजेश जैन ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित जैन सर्किट योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। जैन समाज वाराणसी सहित प्रमुख जैन तीर्थों को जोड़ने वाले जैन सर्किट के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग करता है। कार्यक्रम में ट्रस्ट अध्यक्ष वीके जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।