जागरण टुडे, कासगंज।
बृहस्पतिवार को सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के कथित काले कानून के विरोध में जनपद न्यायालय कासगंज के अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने सरकार के प्रति नाराजगी और रोष व्यक्त करते हुए नारेबाजी की तथा इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि यह कानून देश के छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए घातक है और इसे राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से लाया गया है। साथ ही अधिवक्ताओं ने शंकराचार्य जी को संगम पर स्नान से रोके जाने तथा प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों द्वारा उनके कथित अपमान पर भी कड़ा विरोध जताया।
वरिष्ठ अधिवक्ता रूप किशोर चांडक ने कहा कि सरकार इस काले कानून के माध्यम से छात्रों के भविष्य को चौपट करना चाहती है और समाज को जातिवाद में बांटकर आपस में लड़ाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कानून पूरी तरह से राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है, जिसका अधिवक्ता समाज घोर विरोध करता है।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येंद्र पाल सिंह बैस ने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियां अंग्रेजी शासन से भी बदतर होती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति पर चल रही है और सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। बैस ने कहा कि सरकार हिंदू हितों की बात करती है, लेकिन व्यवहार में हिंदुओं और संत समाज पर ही अत्याचार हो रहे हैं। शंकराचार्य जी जैसे पूज्य संतों का अपमान और उन्हें संगम तट पर स्नान से रोकना सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार भ्रम का वातावरण बनाकर जनता को गुमराह करना चाहती है, लेकिन अब देश की जनता जागरूक हो चुकी है और झूठी नीतियों के बहकावे में नहीं आएगी। उन्होंने माननीय उच्चतम न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायालय ने यूजीसी काले कानून के दुष्परिणामों को समझते हुए उस पर रोक लगाकर जनता के साथ न्याय किया है।
इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल एवं अरुण कुमार शर्मा ने भी अपने विचार रखे। विरोध प्रदर्शन में कासगंज बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनुराग कुमार शर्मा, कोषाध्यक्ष अभिषेक कुमार गुप्ता, पूर्व महासचिव सुरेंद्र कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।