26 सितंबर को शहर में भड़की हिंसा को लेकर अब तक “अचानक भड़का उपद्रव” कहकर पेश की जा रही कहानी पर फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह कोई स्वतःस्फूर्त भीड़ नहीं थी, बल्कि पुलिस को निशाना बनाने के लिए पहले से रची गई साजिश थी। जांच में पेट्रोल और तेजाब जैसे खतरनाक रसायनों के सबूत मिलने के बाद मौलाना तौकीर रजा और उनके समर्थकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक एफएसएल रिपोर्ट में घटनास्थल से जुटाए गए नमूनों में पेट्रोल के अंश और तेजाब से जुड़े रासायनिक तत्व पाए गए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि उपद्रवियों का इरादा केवल पत्थरबाजी तक सीमित नहीं था, बल्कि पुलिसकर्मियों को झुलसाने और जानलेवा हमला करने की मंशा से पेट्रोल बम और एसिड का इस्तेमाल किया गया।
अचानक नहीं, पूरी प्लानिंग के साथ किया हमला
एफएसएल की रिपोर्ट बताती है कि हिंसा के दौरान हालात को जानबूझकर बेकाबू बनाया गया। पुलिस पर अंधाधुंध पथराव किया गया, इसके बाद पेट्रोल बम फेंके गए और तेजाब जैसे खतरनाक पदार्थों से हमला किया गया। रिपोर्ट में इस पूरी घटना को पूर्व नियोजित और घातक हमला बताया गया है। इस हिंसा में एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें कई को गंभीर चोटें आईं और कुछ जवान झुलस भी गए।
कानून-व्यवस्था को दी गई खुली चुनौती
बलवे के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस का वायरलेस सेट और एंटी-रायट गन भी छीन ली। यह केवल हिंसा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश थी। एफएसएल रिपोर्ट ने इस तथ्य की भी पुष्टि कर दी है, जिससे अब पुलिस की कार्रवाई को कानूनी और तकनीकी दोनों स्तरों पर मजबूती मिल गई है।
एफएसएल रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस पर उठाए जा रहे सवालों की धार कुंद हो गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि हिंसा के पीछे सोची-समझी साजिश थी, न कि कोई आकस्मिक घटना। अब पुलिस इस आधार पर आगे की कार्रवाई तेज कर रही है और साजिश में शामिल सभी चेहरों को बेनकाब करने की तैयारी में जुटी है।