जागरण टुडे,कासगंज।
कासगंज सदर नगर पालिका एक बार फिर अपने कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों से घिरी नगर पालिका पर अब मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर दर्ज शिकायतों का फर्जी और कागजी समाधान दिखाने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समस्याएं जमीनी स्तर पर जस की तस बनी हुई हैं, लेकिन पोर्टल पर कार्यालय में बैठे-बैठे ही समाधान दर्शा दिया जाता है।
मामला शहर की आवास विकास कॉलोनी स्थित महाराणा प्रताप पार्क क्षेत्र से जुड़ा है। यहां के निवासी राजीव कुमार ने दिनांक 25 दिसंबर 2025 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या 400020225016184 दर्ज कराई थी। शिकायत में कॉलोनी के रास्ते पर भैंसों को बांधकर मार्ग अवरुद्ध किए जाने की समस्या का उल्लेख किया गया था, जिससे आम नागरिकों और राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।
फोटो पोर्टल पर दर्ज कराई फर्जी निस्तारण की दर्ज कराई गई रिपोर्ट
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा बिना मौके पर जांच किए ही कार्यालय में बैठकर शिकायत का समाधान कर दिया गया और पोर्टल पर समस्या के निस्तारण की रिपोर्ट अपलोड कर दी गई। जबकि हकीकत यह है कि आज भी रास्ते में भैंसें बंधी हुई हैं और मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध है। लोगों को निकलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका द्वारा इस तरह का रवैया अपनाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पोर्टल जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था पर झूठा समाधान दर्ज करना न केवल जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है, बल्कि शासन की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।
नगरवासियों का आरोप है कि यदि शिकायतों का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो वे दोबारा उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे। लोगों ने जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि आईजीआरएस पर किए जा रहे ऐसे कथित फर्जी समाधानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या संज्ञान लेता है और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर कब तक अंकुश लगता है।