जागरण टुडे, कासगंज।
गुरुकुल की भूमि पर कथित कब्जे के मामले और कमिश्नर की जनसुनवाई के दौरान पीड़ित को घसीटते हुए हवालात में बंद किए जाने के प्रकरण में जिलाधिकारी कासगंज प्रणय सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। जहां एक ओर डीएम के निर्देश पर पीड़ित की भूमि को कब्जा मुक्त करा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित के साथ हुए कथित पुलिसिया दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच के आदेश भी दिए गए हैं। इस मामले की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व दिग्विजय सिंह को सौंपी गई है, जो एक सप्ताह के भीतर अपनी आख्या रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे।
यह मामला शनिवार को सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस (कमिश्नर की जनसुनवाई) से जुड़ा है, जहां कासगंज कोतवाली पुलिस के कथित अमानवीय और तानाशाही रवैये को लेकर गंभीर आरोप सामने आए थे। पीड़ित संतोष गौड़, निवासी मोहल्ला जय जय राम, सदर कोतवाली क्षेत्र, पहाड़पुर माफी स्थित गाटा संख्या 215/210 स की भूमि के स्वामी हैं। पीड़ित का कहना है कि वह अपनी उक्त भूमि पर गुरुकुल विद्यालय की स्थापना करना चाहते हैं।
संतोष गौड़ ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेता बौबी कश्यप और कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से उसकी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह पहले ही आईजीआरएस, मुख्यमंत्री पोर्टल और लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री जनता दरबार में शिकायत दर्ज करा चुके हैं।
पीड़ित के अनुसार, कानूनगो पन्ना लाल द्वारा तथ्यों के विपरीत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जबकि उनके पास भूमि से संबंधित प्रारंभिक बिक्री आदेश मौजूद हैं। जब वह समाधान दिवस के दौरान पोस्टर के माध्यम से कथित अनियमितताओं की शिकायत करने जा रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया।
आरोप है कि पुलिस ने पीड़ित के साथ धक्का-मुक्की की, उसे घसीटते हुए तहसील परिसर से बाहर ले जाया गया, जबरन वाहन में बैठाकर कोतवाली ले जाया गया और हवालात में बंद कर दिया गया। पीड़ित ने गला दबाने जैसी गंभीर घटना का भी आरोप लगाया है।
मामले की जानकारी जिलाधिकारी प्रणय सिंह को होते ही उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम संजीव कुमार, तहसीलदार और कानूनगो की संयुक्त टीम को मौके पर भेजा। टीम ने नाप-तौल कर जांच की और गुरुकुल की भूमि को कब्जा मुक्त कराया। वहीं, पुलिस की भूमिका की जांच के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व दिग्विजय सिंह को निर्देशित किया गया है। वह जांच पडताल के एक सप्ताह के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौपेंगे, और जिलाधिकारी रिपोर्ट के आधार पर आग्रिम कार्रवाई करेंगे।