Tuesday, March 31, 2026

फ्री खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे, राज्य सरकारें रोजगार दें

लेखक: Jagran Today | Category: ताजा खबर | Published: February 20, 2026

फ्री खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे, राज्य सरकारें रोजगार दें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- देश के आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने का यही समय

नई दिल्ली, एजेंसी

उच्चतम न्यायालय ने लोगों को मुफ्त सुविधाएं देने की संस्कृति की कड़ी आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि देश के आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है। तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने एक याचिका दायर कर उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना हर किसी को नि:शुल्क बिजली प्रदान करने का प्रस्ताव दिया है।

शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर राज्य गरीबों की मदद करते हैं तो यह बात पूरी तरह से समझ में आती है। देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अधिकतर राज्यों का राजस्व घाटे में हैं लेकिन वे विकास की अनदेखी करते हुए इस तरह की मुफ्त सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की मुफ्त सुविधाएं देने से देश के आर्थिक विकास में बाधा पैदा होती है और राज्यों को सभी को मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली देने के बजाय रोजगार के अवसर खोलने के लिए काम करना चाहिए।

न्यायालय ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार के नेतृत्व वाली बिजली वितरण कंपनी की मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखने वाली याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया। बिजली वितरण कंपनी ने विद्युत संशोधन नियम, 2024 के एक नियम को चुनौती दी है। पीठ ने कहा, भारत में हम कैसी संस्कृति विकसित कर रहे हैं? यह समझ में आता है कि कल्याणकारी कदमों के तहत आप उन लोगों को (नि:शुल्क) सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहते हैं, जो बिजली शुल्क चुकाने में असमर्थ हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, लेकिन जो वहन कर सकते हैं और जो नहीं कर सकते, उनमें भेद किए बिना आप वितरण शुरू कर देते हैं। क्या यह तुष्टीकरण की नीति नहीं होगी?

पीठ ने पूछा कि बिजली शुल्क अधिसूचित होने के बाद तमिलनाडु की कंपनी ने अचानक जेब ढीली करने का फैसला क्यों किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, राज्यों को रोजगार के रास्ते खोलने के लिए काम करना चाहिए। अगर आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन देना शुरू कर देंगे, फिर मुफ्त साइकिल, मुफ्त बिजली देंगे, तो कौन काम करेगा और फिर कार्य संस्कृति का क्या होगा। पीठ ने कहा कि राज्य विकास परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय दो काम करते हैं- वेतन देना और इस तरह की मुफ्त सुविधाएं बांटना।

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