जागरण टुडे, कासगंज।
जनपद में निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से कथित रूप से मनमानी वसूली किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कॉपी-किताबों और हर वर्ष ड्रेस बदलने के नाम पर अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। इस व्यवस्था के खिलाफ समाजसेवियों ने मोर्चा खोल दिया है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
रविवार को शहर के एक निजी होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान समाजसेवी हरवीर सिंह भारतीय ने आरोप लगाया कि जिले के कई निजी विद्यालय शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि व्यापार के रूप में चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
उनका कहना है कि हर वर्ष ड्रेस बदलने की परंपरा भी अभिभावकों के आर्थिक शोषण का माध्यम बन गई है। इसके अलावा बुक सेलरों और स्कूल प्रबंधन के बीच कमीशनखोरी का भी आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।
हरवीर सिंह भारतीय ने बताया कि इस प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से एक संगठन का गठन किया गया है, जो अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र ही इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए, तो 26 फरवरी से आमरण अनशन और भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाए, किताबों और ड्रेस की खरीद को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा अभिभावकों को राहत प्रदान की जाए।
प्रेस वार्ता में मौजूद अन्य लोगों ने भी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और शोषण पर अंकुश लगाने की मांग की। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है। इस मौके पर सुखवीर सिंह यादव, प्रदीप यादव,देवेश राजपूत, चंद्रशेखर राजपूत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।