जागरण टुडे, गुड्डू यादव कासगंज।
शिक्षा को लूट से मुक्त’ अभियान के अंतर्गत गांधी मूर्ति, नदरई गेट पर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। धरने का नेतृत्व हरवीर सिंह भारतीय कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि निजी स्कूलों द्वारा मनमानी किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री अनिवार्य किए जाने से अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
धरने के दूसरे दिन समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह यादव सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि अभिभावकों का शोषण रोका जा सके और विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें।
धरना दे रहे लोगों ने प्रशासन के समक्ष तीन सूत्रीय मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि सभी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू की जाएं और निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की अनिवार्यता समाप्त की जाए। दूसरी मांग के तहत शिक्षा नीति को कम से कम तीन से पांच वर्ष तक स्थिर रखा जाए, ताकि बार-बार होने वाले बदलाव से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को परेशानी न हो। तीसरी मांग स्कूल शुल्क पर नियंत्रण और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की है।
दूसरे दिन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) जगदीश शुक्ला और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) सूर्य प्रताप सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से वार्ता कर आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा तथा स्कूल संचालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। अधिकारियों ने यह भी कहा कि संबंधित विद्यालयों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हालांकि, धरनारत नेताओं का कहना है कि जब तक प्रशासन की ओर से लिखित आदेश सार्वजनिक नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। उनका स्पष्ट कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
धरना स्थल पर शांतिपूर्ण ढंग से नारेबाजी की गई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसात्मक है और अभिभावकों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।