बदायूं बदायूं जनपद के मूसाझाग इलाके में स्थित एचपीसीएल प्लांट के प्रबंधक सुधीर गुप्ता (57) उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा (32) की हत्या के मामले में एसएसपी ने बड़ा एक्शन लिया है। सीओ उझानी डॉ. देवेन्द्र कुमार की जांच रिपोर्ट पर एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने मूसाझाग थाने के प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार और हल्का इंचार्ज उप निरीक्षक धर्मेन्द्र कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इस मामले की जांच सीओ सिटी रजनीश उपाध्याय को सौंपी गई है।
यह है पूरा मामला
बदायूं के मूसाझाग थाना क्षेत्र के डहरपुर कलां-म्याऊं मार्ग स्थित गांव सैंजनी के पास एचपीसीएल का कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट है। नोएडा सेक्टर 50 के सिल्वर एस्टेट अपार्टमेंट ब्लॉक दो निवासी सुधीर गुप्ता (57) प्लांट में बतौर प्रबंधक और पीलीभीत जिले के कस्बा पूरनपुर के वार्ड तीन मोहल्ला साहूकारा निवासी हर्षित मिश्रा (32) पुत्र सुशील कुमार उप प्रबंधक पद पर तैनात थे। सूत्र बताते हैं कि एचपीसीएल में आउटसोर्सिंग पर भर्ती को लेकर प्लांट के अफसरों और गांव सैंजनी निवासी अजय प्रताप सिंह के बीच विवाद चल रहा था। गड़बड़ियां सामने आने पर अजय प्रताप सिंह को प्लांट से बाहर कर दिया गया था। इससे वह प्रबंधक सुधीर गुप्ता और उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा से रंजिश मानने लगा। उसके खिलाफ प्रबंधन ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी, जिससे वह और ज्यादा बौखला गया।
गुरुवार दोपहर लगभग दो बजे अजय प्रताप प्लांट के अंदर पहुंचा। उस वक्त प्रबंधक सुधीर गुप्ता और उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा अपने कार्यालय में अधीनस्त अफसरों के साथ बैठक कर रहे। आरोप है कि अजय प्रताप ने कार्यालय के अंदर पहुंचते ही प्रबंधक प्रबंधक सुधीर गुप्ता और उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से दोनों अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। अचानक फायरिंग होने से प्लांट में अफरातफरी मच गई। मौके पर मौजूद अधिकारी व कर्मचारी खुद की जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ देर बाद घायल प्रबंधक व उप उप्रबंध को सीएचसी दातागंज ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही बदायूं एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह समेत कई अफसर मौके पर जा पहुंचे और छानबीन शुरू कर दी। बरेली जोन के एडीजी रमित शर्मा, डीआईजी अजय साहनी नेभी मौका मुआयना किया। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से बातचीत की और प्लांट में लगे सीसीटीवी फुटेज से हत्यारोपी की पहचान की। इसके बाद हत्यारोपी अजय प्रताप को गिरफ्तार कर लिया है।
प्लांट का सुरक्षाघेरा भेद प्लांट में कैसे पहुंचा हत्यारोपी
हिन्दुस्तान पेट्रोलियम प्लांट में प्रबंधक और उपप्रबंधक की हत्या की घटना ने दबंगई-गुंडई की सच्चाई सामने ला दी है। प्लांट के कर्मचारियों का कहना है कि हमलावर अजय प्रताप सिंह बहुत दबंग किस्म का है और अक्सर हथियार लेकर यहां आता था। किसी की क्या मजाल जो दबंग अजय प्रताप को रोकने-टोकने की हिम्मत जुटा पाए। प्लांट से निकाले जाने के बाद भी उसका अंदर आना रहता था। बताते हैं कि घटना के समय वह कुछ अन्य कर्मचारियों के साथ कार में आया और बेखौफ प्लांट के अंदर दाखिल हो गया। उसे न किसी ने टोका और न ही उसकी तलाशी ली गई। यही वजह रही कि वह आसानी से हथियार लेकर ऑफिस तक जा पहुंचा और दोनों अधिकारियों की हत्या कर आसानी से निकल भी गया।
एचपीसीएल प्रबंधन और अजय प्रताप के बीच चल रहा विवाद किसी से छिपा नहीं था। मामला हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के उच्च अधिकारियों से लेकर पुलिस तक को सब कुछ मालूम था। मारे गए अफसरों ने लोकल स्तर पर पुलिस से लगातार शिकायत कर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन मदद नहीं मिली। अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया गया। प्लांट कर्मियों के अनुसार, हत्यारोपी प्लांट की बोलेरो से आया था। साथ में प्लांट के चार और कर्मचारी दूसरी शिफ्ट में ड्यूटी करने दातागंज से आए थे। प्लांट की गाड़ी होने की वजह से सुरक्षाकर्मियों ने हत्यारोपी अजय प्रताप पर गौर नहीं किया। वह मेन गेट से तकरीबन एक किलोमीटर भीतर तक जा पहुंचा। साथ आए कर्मचारी काम पर चले गए, लेकिन अजय प्रताप कार्यालय में घुस और घटना को अंजाम दिया। गोली मारने के बाद वह कार में बैठकर चालक के साथ प्लांट से वापस निकल गया। हालांकि, बाद में नाटकीय रूप से पुलिस की पकड़ में भी आ गया है।
सूत्रों का दावा है कि कि महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता ने हाल ही में कुछ कर्मचारियों की छटनी की और उन्हें काली सूची में डाल दिया था, जिनका काम संतोषजनक नहीं था। हटाए गए कर्मियों में हत्यारोपी अजय प्रताप भी शामिल था। आरोपी ने कथित तौर पर कई बार गुप्ता को धमकियां दी थीं। पहले भी गुप्ता की कार पर हमला किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। बाद में उसके खिलाफ दातागंज कोतवाली में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद भी पुलिस ने कार्रवाई और सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया। इसे लेकर पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटना के बाद इस बात पर सवाल उठाए गए हैं कि आरोपी हथियार के साथ उच्च सुरक्षा वाले संयंत्र के परिसर में प्रवेश करने और सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोके या तलाशी लिए बिना कार्यालय क्षेत्र तक पहुंचने में कैसे कामयाब रहा? डीएम अवनीश राय ने घटना के बारे में जानकारी दी है कि हत्या में शामिल सेजनी गांव निवासी आरोपी अजय प्रताप सिंह उर्फ रामू पहले इथेनॉल संयंत्र में विक्रेता के रूप में काम करता था। वहीं, एसएसपी डॉ. ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
प्रबंधक ने पुलिस को दी शिकायत में जताई थी घटना की आशंका
दबंग अजय प्रताप की धमकी से परेशान प्रबंधक सुधीर गुप्ता ने उसके खिलाफ थाना मूसाझाग में एफआईआर दर्ज कराई थी। संयत्र में तैनात अफसरों को लगातार धमकाकर आतंकित किया जा रहा था। अफसरों ने कहा था कि अगर सुरक्षा नहीं मिली तो प्लांट बंद करने पड़ेगा। इसके बाद भी पुलिस ने शिकायत को नजरअंदाज करती रही। आरोपी पर कार्रवाई करती तो शायद दो अफसरों की जान बच सकती थी।
पूर्व में पुलिस को दी गई शिकायत में प्रबंधक ने बताया था कि अजय प्रताप मैसर्स लक्ष्य पावरटेक कंपनी की ओर से कांटेक्ट वर्कर के रूप में कार्यरत है। वह सीबीजी प्लांट पर बार-बार आकर आपराधिक कृत्य, धमकी और भय का वातावरण उत्पन्न कर रहा है। सीबीजी प्लांट प्रदेश सरकार की ओर से प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित है। बताते हैं कि 13 जनवरी 2025 की दोपहर लगभग पौने चार बजे अजय प्रताप ने एक अन्य ठेकेदार की टैक्सी को जबरन कब्जे में लेकर प्लांट के कांफ्रेंस रूम तक पहुंचा। खुलेआम सभी को देख लेने की धमकी दी। उसी दिन प्रबंधक पौने छह बजे कार्यालय से वापस लौट रहे थे। प्लांट से सैंजनी मार्ग पर रास्ते में अजय प्रताप ने हाथ देकर जबरन प्रबंधक की गाड़ी रुकवाई और धमकाया।
अगले दिन सुबह करीब सवा 11 बजे अजय प्रताप जबरन प्लांट में घुसा और लोकेशन इंचार्ज कार्यालय में घुसकर चिल्लाते हुए धमकाया। प्लांट के अधिकारी अन्य अधिकारियों से शिकायत करने गाड़ी से निकले तो आरोपी ने उनका पांच किमी तक पीछा किया। बराबर में बाइक चलाकर धमकाता रहा। प्रबंधक ने तहरीर में कहा था कि अगर प्लांट के किसी भी अधिकारी, कर्मचारी के जीवन को कोई खतरा या क्षति होती है तो इसका जिम्मेदार अजय होगा। सुरक्षा न मिलने पर मजबूरन प्लांट बंद करना पड़ेगा। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज की लेकिन आगे की कार्रवाई करनी भूल गई।
नोएडा के गैंगस्टर गिरोह से जुड़ा होने की देता था धमकी
आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकाता था कि वह नोएडा के एक गैंगस्टर गिरोह से जुड़ा है। 13 जनवरी को भी उसने अधिकारियों को धमकाया था कि वह कई साल से उस गैंगस्टर गिरोह के लिए काम करता आ रहा है। उसने खुद को भी जिला शाहजहांपुर के गैंगस्टर गिरोह का सदस्य बताया। अपने शरीर पर चाकुओं के निशान भी दिखाए थे। बताया जा रहा है कि वह इससे पहले भी गिरोह का सदस्य बताकर धमकाता आ रहा है।
एचपीसीएल प्लांट को बर्बाद करने की रची जा रही साजिश: धर्मेन्द्र कश्यप
भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप का कहना है कि कुछ लोग प्लांट को बर्बाद करना चाहते हैं। प्लांट में पहले भी कई आपराधिक घटनाएं हो चुकी थीं। जिन अधिकारियों की हत्या हुई है वे पहले से सुरक्षा मांग रहे थे। मगर प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस अनदेखी करती रही। पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप ने बताया कि उन्होंने केन्द्रीय स्तर पर प्रयास करके प्लांट को दातागंज में स्थापित कराया था। पहले प्लांट हरदोई के संडीला इलाके में प्रस्तावित था। बदायूं के तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह के साथ प्रयास करके प्लांट बदायूं लाया गया। प्लांट लगने के बाद से ही दातागंज क्षेत्र के कुछ लोग गड़बड़ी करने में लग गए थे। एचपीसीएल के अधिकारी और कर्मचारियों को दबंग धमकाकर निजी हित के काम कराने को दबाव बनाते थे।
धर्मेन्द्र कश्यप ने कहा कि प्लांट के अंदर दो अधिकारियों की हत्या में शामिल ब्लैक लिस्ट ठेकेदार प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के चलते वहां लगातार गुंडई कर रहा था। उसके खिलाफ प्लांट प्रबंधन ने शिकायतें भी की थीं, लेकिन दबाव में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने अपना काम सही से नहीं किया, जिसका बुरा नतीजा आज सबके सामने है। उन्होंने पुलिस की भूमिका के साथ अपराधियों को संरक्षण देने वालों की भी जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।