बरेली के मीरगंज तहसील क्षेत्र में शुक्रवार सुबह अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया, जिससे अन्नदाताओं के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं।
सुबह से शुरू हुई तेज बारिश और हवाओं के कारण जहां मौसम में ठंडक बढ़ गई, वहीं किसानों के लिए यह किसी संकट से कम नहीं रही। खेतों में पककर तैयार खड़ी गेहूं, सरसों और लाही की फसलें हवा के तेज दबाव के चलते जमीन पर गिरने लगीं। इससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
क्षेत्र के कई गांवों में फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। खासकर गेहूं की फसल अधिक प्रभावित हुई है, जो कटाई के करीब थी। वहीं सरसों और चना भी इस प्राकृतिक मार से अछूते नहीं रहे। इसके अलावा टमाटर और मिर्च जैसी सब्जी फसलों को भी नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।
गांव मनकरा के किसान भूकन लाल, छेदा लाल गंगवार, मानसिंह और श्यामलाल के साथ ही हल्दी खुर्द के चौधरी हरवीर सिंह और सिंधौली के हरपाल सिंह ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि पहले वे आवारा पशुओं से फसलों को बचाने में लगे थे, और अब मौसम की मार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
फिलहाल आसमान में बादल छाए हुए हैं, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों को डर सता रहा है कि यदि फिर से तेज बारिश हुई तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराया जाए और पारदर्शी तरीके से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस आर्थिक संकट से उबर सकें।