जागरण टुडे डेस्क। ओडिशा के पुरी में 12वीं शताब्दी में निर्मित जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार आज 46 साल दोपहर 1:28 बजे शुभ मुहुर्त में खोला गया, इससे पहले यह 1978 में खोला गया था। इस साल राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान यह मुद्दा काफी छाया रहा था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी रैली में ओडिशा में बीजेपी की सरकार बनने पर मंदिर का रत्न भंडार खोलने का जिक्र किया था। चूंकि अब राज्य में बीजेपी की सरकार है तो मंदिर के खजाने की सूची बनाने के रत्न भंडार को खोला गया है।
रत्न भंडार में तीन देवताओं के रखे हैं अभूषण
जगन्नाथ मंदिर में एक ही रत्न भंडार है, इसमें भगवान जगन्नाथ, बालभद्र और सुभद्रा के जेवरात रखे हैं। बताया जाता है कि चार धामों में एक जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में बेशकीमती अभूषण रखे है। यह अभूषण भगवान को राजाओं और भक्तों ने चढ़ाए थे। मंदिर के उत्तरी किनारे बने इस भंडार में रखे अभूषणों का आज तक मूल्यांकन नहीं किया गया है।
मान्यता : सांप करते हैं खजाने की रखवाली
लोगों में ऐसी मान्यता है कि मंदिर के रत्न भंडार की रक्षा सांप करते हैं। इसे खोलने से पहले किसी भी अप्रिय घटना की आशंका में सांपों को पकड़ने वालों को भी बुलाया गया है, इसके साथ ही डॉक्टरों की एक टीम भी वहां तैनात की गई है, जो कोई भी अनहोनी होने पर तुरंत इलाज शुरू कर सकेगी।
रत्न भंडार के तीन कक्षों में है करोड़ों का खजाना
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे के मुताबिक रत्न भंडार में तीन कक्ष हैं, इनमें आंतरिक, बाहरी और वर्तमान कक्ष शामिल है। आंतरिक कक्ष में 50 किलो 600 ग्राम सोना और 134 किलो 50 ग्राम चांदी है। इनका कभी इस्तेमाल नहीं हुआ। बाहरी कक्ष में 95 किलो 320 ग्राम सोना और 19 किलो 480 ग्राम चांदी है। इन्हें त्योहारों पर ही निकाला जाता है, जबकि वर्तमान कक्ष में तीन किलो 480 ग्राम सोना और 30 किलो 350 ग्राम चांदी है। दैनिक अनुष्ठान के लिए वर्तमान कक्ष में रखे अभूषणों का ही उपयोग होता है।
उच्च स्तरीय कमेटी की निगरानी में खुलेंगे कक्ष
ओडिशा सरकार ने रत्न भंडार को खोलने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए मंदिर परिचालन कमेटी के सदस्यों के साथ रिजर्व बैंक और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। इस कमेटी की निगरानी में भंडार कक्ष में रखी कीमती वस्तुओं की सूची तैयार की जाएगी। कमेटी का गठन ओडिशा हाईकोर्ट के निर्देशानुसार किया गया है।
चाबी खोने की बात सामने आने पर खड़ा हुआ विवाद
ओडिशा सरकार ने मंदिर की संरचना की भौतिक जांच कराने का प्रयास किया तो चार अप्रैल 2018 को पता चला कि रत्न भंडार की चाबियां खो गईं हैं। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मामले की न्यायिक जांच का आदेश दिया और नवंबर 2018 में आयोग ने 324 पेज की रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद पुरी के तत्कालीन जिलाधिकारी को रहस्यमय तरीके से एक लिफाफा मिला, जिसमें लिखा था कि आंतरिक रत्न भंडार की नकली चाबियां। इसके बाद लंबे समय से चल रहे विवाद और गहरा गया। इस मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने गए। इसके बाद रैली में प्रधानमंत्री ने रत्न भंडार का जिक्र करते हुए कहा कि जगन्नाथ मंदिर सुरक्षित नहीं है। इसके रत्न भंडार की चाबी पिछले छह साल से गायब है। चुनाव के दौरान यह बड़ा मुद्दा बना रहा।