आरक्षण के विरोध में बांग्लादेश में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन ने शुक्रवार को हिंसक रूप ले लिया। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलानी पड़ी और आंसू गैस के गोले दागे गए, जिसमें अब तक 105 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें 52 मौतें अकेले राजधानी ढाका में हुई हैं। प्रदर्शनकारियों ने नरसिंगड़ी जिले में एक जेल पर धावा बोलकर कैदियों को मुक्त करा लिया और जेल में आग लगा दी। हालात बेकाबू होने पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया है। इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई है। हालात पर काबू पाने के लिए कमान सेना को सौंप दी गई है।
बवाल के पीछे यह है वजह
बांग्लादेश सरकार ने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले सैनानियों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी में 30 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। 1972 से जारी इस आरक्षण व्यवस्था को 2018 में सरकार ने खत्म कर दिया था मगर पिछले महीने हाईकोर्ट ने इसे फिर से बहाल कर दिया। कोर्ट ने आरक्षण खत्म करने के फैसले को भी गैरकानूनी बताया था। इस फैसले के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। बांग्लादेश सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। अब मामले की सुनवाई सात अगस्त को होनी है। हालात तब बेकाबू हो गए जब प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मामला कोर्ट में होने की बात कहते हुए प्रदर्शनकारियों की मांग पूरी करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया।
भारत ने दो ट्रेनें रद कीं, यूएन महासचिव ने जताई चिंता
भारत-बांग्लादेश के बीच चलने वाली मैत्री ट्रेनों को रद कर दिया गया है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने ढाका के अधिकारियों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बात कर समस्या का सामधान खोजने की गुजारिश की है।