यूपी की राह पर चलते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने भी प्रदेश में होटल और खाने-पीने की दुकानों के बार मालिक का नाम और मोबाइल नंबर लिखने का आदेश जारी किया है। उज्जैन में इस आदेश का पालन न करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार ने प्रतिष्ठानों के मालिकों से कहा है कि वे अपने प्रतिष्ठानों के बाहर अपना नाम और मोबाइल नंबर प्रदर्शित करें, जो स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। उज्जैन के मेयर मुकेश टटवाल ने कहा कि पहली बार उल्लंघन करने वालों पर दो हजार और दूसरी बार उल्लंघन करने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
लोगों को दुकान मालिक का नाम जानने का हक
मेयर ने कहा कि उज्जैन एक धार्मिक शहर है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करते आते हैं। लोगों को यह जानने का अधिकारी है कि वे किस दुकानदार की सेवाएं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आदेश मध्य प्रदेश दुकान स्थापना अधिनियम या गुमास्ता लाइसेंस के तहत है। इसके बाद कई अन्य शहरों में भी प्रशासन ने यही प्रक्रिया अपनाने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। भाजपा नेता भी सीएम मोहन यादव से इसे पूरे राज्य में लागू करने की मांग कर रहे हैं।
फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 22 जुलाई को सुनवाई
एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नामक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके यूपी सरकार के फैसले को रद करने की मांग की है। 20 जुलाई को ऑनलाइन दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई की तारीख तय की है।
आदेश के खिलाफ कोर्ट जाएगी जमीयत उलमा ए हिंद
यूपी सरकार के आदेश को चुनौती देने के लिए जमीयत उलमा ए हिंद ने कोर्ट जाने का फैसला किया है। इसी सिलसिले में रविवार को जमीयत उलमा ए हिंद ने एक बैठक बुलाई। बैठक में कहा गया कि इस आदेश की आड़ में नफरत की राजनीति की जा रही है। आदेश को भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक बताते हुए सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बात कही गई। कहा गया कि उनकी कानूनी टीम इस आदेश के कानूनी पहलुओं पर विचार करने में जुटी है ताकि इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सके।
मौलाना मदनी बोले- इस फैसले का देश विरोधी ताकतें उठा सकती हैं फायदा
जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यह फैसला भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक है, इसका देश विरोधी ताकतें लाभ उठा सकती हैं। इसके कारण सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि देश के संविधान में नागरिकों को इस बात की पूरी आजादी दी गई है कि वे जो चाहें पहनें, खाएं, उनकी व्यक्तिगत पसंद में कोई बाधा नहीं डालेगा, क्योंकि यह नागरिकों के मौलिक अधिकार के विषय हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का आदेश मौलिक अधिकारों का हनन करने वाला है।