Saturday, January 31, 2026

KASGANJ NEWS शिवरात्रि मेला बना वसूली का जरिया! सोरों नगर पालिका में पहली बार दुकानों व पार्किंग ठेके की बोली, बुद्धिजीवियों ने जताया कड़ा विरोध, बोले वैमनस्यता मिटाने के लिए कराई जाये ई- टेंडरिंग व्यवस्था

लेखक: Guddu Yadav | Category: उत्तर प्रदेश | Published: January 31, 2026

KASGANJ NEWS शिवरात्रि मेला बना वसूली का जरिया! सोरों नगर पालिका में पहली बार दुकानों व पार्किंग ठेके की बोली, बुद्धिजीवियों ने जताया कड़ा विरोध, बोले वैमनस्यता मिटाने के लिए कराई जाये ई- टेंडरिंग व्यवस्था


जागरण टुडे,कासगंज।

सोरों नगर पालिका परिषद एक बार फिर भ्रष्टाचार और मनमानी फैसलों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला शिवरात्रि मेले से जुड़ा हुआ है। नगर पालिका द्वारा पहली बार शिवरात्रि मेले के दौरान लगने वाली दुकानों, पार्किंग स्थलों तथा नगर पालिका के अधीन गेस्ट हाउस, सामुदायिक धर्मशालाओं और बारात घरों के संचालन के लिए ठेका प्रणाली लागू कर बोली प्रक्रिया शुरू कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से नगर के बुद्धिजीवी वर्ग, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह निर्णय नगर पालिका के प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) और नगर पालिका अध्यक्ष की आपसी मिलीभगत से लिया गया है। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में आपसी वैमनस्य, झगड़ा-फसाद रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ई-टेंडरिंग और जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद सोरों नगर पालिका द्वारा उन आदेशों को नजरअंदाज कर पारंपरिक धार्मिक आयोजन को ठेका प्रणाली से जोड़ दिया गया है।



सोरों नगर पालिका परिषद एक बार फिर भ्रष्टाचार और मनमानी फैसलों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला शिवरात्रि मेले से जुड़ा हुआ है। नगर पालिका द्वारा पहली बार शिवरात्रि मेले के दौरान लगने वाली दुकानों, पार्किंग स्थलों तथा नगर पालिका के अधीन गेस्ट हाउस, सामुदायिक धर्मशालाओं और बारात घरों के संचालन के लिए ठेका प्रणाली लागू कर बोली प्रक्रिया शुरू कराए जाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से नगर के बुद्धिजीवी वर्ग, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि सोरों नगर पालिका के इतिहास में यह पहली बार है जब शिवरात्रि जैसे पवित्र और आस्था से जुड़े पर्व पर इस तरह की बोली प्रक्रिया लागू की जा रही है। पूर्व में शिवरात्रि मेले के दौरान दुकानों और पार्किंग की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर शांतिपूर्ण तरीके से होती रही है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता था और सामाजिक सौहार्द भी बना रहता था।




लोगों का मानना है कि ठेका प्रणाली लागू होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे आपसी वैमनस्य, विवाद और झगड़ों की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। साथ ही आशंका जताई जा रही है कि ठेका लेने वाले ठेकेदार श्रद्धालुओं से मनमानी वसूली करेंगे, जिसका सीधा असर आम जनता और मेले में आने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ेगा।

बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए और पूर्व की भांति केवल आवश्यक ठेके ही पारदर्शी तरीके से दिए जाएं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को विवश होंगे। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन जनता की भावनाओं को कितना महत्व देता है।

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