जागरण टुडे संवाददाता, बदायूं। अभिभावक अपने बच्चों का इस उम्मीद के साथ शहर के अच्छे से अच्छे स्कूल में दाखिला कराते हैं ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा मिले और वे कामयाबी हासिल करें, इसके लिए वह हर परेशानी झेलकर स्कूल फीस भरते हैं लेकिन अगर वही स्कूल उनके बच्चे को ऐसा जख्म दे दे, जिसे वह जिंदगी भर न भुला सकें तो उसका हर्जाना कौन भरेगा।
यूपी के बदायूं में आठ साल पहले एक प्रतिष्ठित स्कूल में ऐसी ही एक घटना घटित हुई, जिसने एक पांच साल की बच्ची को ऐसा जख्म दिया, जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएगी। 23 जुलाई को आए इस घटना के फैसले ने उसके आठ साल पुराने जख्म फिर ताजा कर दिए मगर उसे कहीं न कहीं संतोष भी होगा क्योंकि उसके साथ गलत हरकत करने वाले को कोर्ट ने दोषी करार दिया और उसे सात की सजा सुनाने के साथ ही 20 हजार रुपये को जुर्माना लगाया।
यह फैसला विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दीपक यादव ने सुनाया।
पोछा लगाने के बहाने घुस आता था बाथरूम में
छात्रा की मां की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक दो दिसंबर को जब वह घर लौटी तो उनकी बेटी ने अपना दर्द बयां किया। बताया कि जब भी बाथरूम जाती है, पोछा लगाने के बहाने रमेश अंकल यानि स्कूल का स्वीपर उसके पीछे बाथरूम में आ जाता है। बाथरूम में वह उसके प्राइवेट पार्ट छू है। किसी को बताने पर बाथरूम में बंद करने और जान से मारने की धमकी देता है।
घटना को दबाने में लगा रहा स्कूल प्रबंधन
अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने वाले और धनबल के सराहे चलने वाले निजी स्कूलों में अक्सर प्रबंधन बदनामी के डर से गंभीर अपराधों को छुपाने की पुरजोर कोशिश करता है। इस मामले में भी यही हुआ। टालमटोल के बाद घटना के तीन दिन बाद बमुश्किल स्कूल प्रबंधन ने सीसीटीवी फुटेज चेक की, जिससे घटना सही साबित हुई। इसके बाद बच्ची की मां को आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर टरका दिया मगर कई दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। बच्ची की मां ने अपने बयान में कहा कि स्कूल के रवैये से यह प्रतीत हो रहा था कि प्रकरण की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए स्कूल प्रबंध लापरवाह और अपराध को बढ़वा देने वाला बना रहा।
स्कूल वालों ने नहीं सुनी तो पुलिस का लिया सहारा
शिकायत के बाद भी जब स्कूल प्रबंधन घटना को दबाने की कोशिश में जुटा रहा तो पीड़ित बच्ची की मां ने बदायूं कोतवाली में तहरीर दी। पुलिस ने आरोपी बदायूं के मोहल्ला लोटनपुरा निवासी रमेश के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत छेड़खानी और धमकाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इसके बाद वह जमानत पर जेल से रिहा हो गया। विवेचक संत प्रसाद उपाध्याय ने रमेश के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के बाद मंगलवार को न्यायाधीश ने विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी, वीरेंद्र वर्मा, प्रदीप भारती और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद आरोपी को दोषी माना और उसे सजा सुनाई।
कोर्ट की स्कूल पर टिप्पणी- अपका दायित्व सुरक्षा देना... वही नहीं कर रहे
फैसला सुनाते वक्त न्यायाधीश दीपक यादव ने कहा कि सीसीटीवी की फुटेज से सत्यतता साबित होने के बाद भी स्कूल प्रबंधन ने दोषी पर कार्रवाई नहीं की। ऐसे मामलों में बच्चे मुश्किल से कोई बात अपने माता-पिता को बताते हैं। बमुश्किल बताने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर स्कूल ने लीतापोती की कोशिश की। न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता का स्कूल में काम करने वाले सफाइकर्मी ने लैंगिग उत्पीड़न किया। अबोध बालिका घटना से सदमे में रही है। विद्यालय प्रबंधन जिसका पहला दायित्व बच्चों की सुरक्षा प्रदान करना है, उसने न केवल अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ लिया, बल्कि सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद न तो आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की और न ही पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सौंपी।