लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य और औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। राज्य के Medical Devices Park में ₹587 करोड़ का निवेश हुआ है, जिससे उत्तर प्रदेश को मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से 2,900 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें: एडीएम के समझाने पर सिटी मजिस्ट्रेट बोले क्या अरेस्ट करने आए हो
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल डिवाइस पार्क में देश-विदेश की कंपनियां निवेश कर रही हैं, जो उन्नत चिकित्सा उपकरणों का निर्माण करेंगी। इनमें डायग्नोस्टिक मशीनें, सर्जिकल उपकरण, इम्प्लांट्स और अन्य हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स शामिल हैं। इससे न केवल राज्य की औद्योगिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता भी कम होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतियों का मिला लाभ
राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सिंगल विंडो सिस्टम का असर अब साफ दिखने लगा है। मेडिकल डिवाइस पार्क में कंपनियों को जमीन, बिजली, पानी और लॉजिस्टिक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
युवाओं को मिलेगा सीधा फायदा
इस परियोजना से इंजीनियरिंग, फार्मा, बायोटेक और टेक्निकल सेक्टर से जुड़े युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय स्तर पर कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की मांग बढ़ने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल डिवाइस पार्क में घरेलू स्तर पर उपकरणों का निर्माण होने से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक किफायती होंगी। अस्पतालों और मरीजों को कम लागत पर आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हो सकेंगे।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य को मेडटेक हब के रूप में स्थापित करना है। Medical Devices Park में हो रहा निवेश ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति देगा और आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को इस सेक्टर में अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल करेगा।