जागरण टुडे संवाददाता, मथुरा। हंसते और खिलखिलाते बच्चे बरबस ही सबका मन मोह लेते हैं। बच्चों का हंसना और खिलखिलाना बहुत हद तक उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। यदि छह माह तक बच्चे को केवल स्तनपान और उसके दो साल बाद तक स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार दिया जाए तो बच्चा सुपोषित होगा और हंसी लंबे समय तक उसके चेहरे पर रहेगी। यह कहना है प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा का।
वह कहते हैं कि स्तनपान बच्चे के संपूर्ण पोषण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए उत्तम विकल्प है। शोध से यह निष्कर्ष सामने आए हैं कि यदि नवजात को जन्म के एक घंटे के अंदर मां का दूध दिया जाए और छह महीने तक केवल स्तनपान कराया जाए तो बाल मृत्यु दर में 22 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इसे लेकर जागरूकता फैलानी बहुत जरूरी है। प्रमुख सचिव ने कहा कि घरों और अस्पतालों में डिब्बा बंद दूध को हतोत्साहित किया जाए। कार्यस्थल व सार्वजानिक स्थानों पर स्तनपान कक्ष की व्यवस्था करें, जिससे बिना संकोच माताएं बच्चों को स्तनपान करा सकें। इन सब प्रयासों से भावी पीढ़ियों का अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित होगा।
छह महीने तक मां के दूध के अलावा कुछ भी न दें
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल का कहना है कि स्तनपान का मतलब है कि छह महीने तक केवल मां का दूध, इसके अलावा और कुछ भी नहीं... कुछ भी नहीं मतलब कुछ भी नहीं, पानी की एक बूंद भी नहीं। वह कहती हैं कि स्तनपान एक जीवन रक्षक व्यवहार है। जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कराने और छह महीने तक केवल स्तनपान कराने से न केवल शिशु की पोषण संबंधी सभी जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि मां का दूध बच्चे को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और शारीरिक और बौद्धिक विकास में भी सहायता करता है। इतना ही नहीं, वयस्क होने पर मोटापे और जीवनशैली संबंधी बीमारियों की संभावना को भी रोकता है।
डॉ. जोवेल ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जोर देता है। प्राइवेट अस्पतालों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है।