बदायूं का जिला महिला अस्पताल शुक्रवार को जंग का मैदान बन गया। विवाद सरकारी और ठेका कर्मचारियों के बीच था। सरकारी कर्मचारियों को आपत्ति इस बात से थी कि उनके बीच ठेका कर्मचारियों कि रात में ड्यूटी क्यों लगा दी गई। चूंकि महिला अस्पताल है तो जाहिर सी बात है कि कर्मचारी भी महिलाएं ही रही होंगी। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि महिलाओं के बीच जमकर जूतम पैजार भी हुई। मसला अवैध वसूली का था तो कोई कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहा। न वो जिन्होंने पीटा और न जो पिटे। हालांकि ठेका कर्मचारी जरूर इकट्ठा होकर अधिकारियों के पास शिकायत करने पहुंचे गए। उन्होंने अपना शिकायती पत्र दिया और व्यथा सुनाई। अधिकारियों ने भी आश्वासन की घुट्टी पिलाई। सब शांत होकर घर को लौट गए। दूसरे पक्ष ने अब तक इस मामले में कोई शिकायत नहीं की है।
झगड़े की वजह बताने को कोई भी तैयार नहीं
इस पूरे मामले में एक बात जो अब तक अनसुलझी है उस पर कोई बात करने को तैयार नहीं है। आखिरकार ऐसा क्या हुआ जो महिला कर्मचारी मारपीट पर ऊतारी हो गईं। एक पक्ष तो सिरे से गायब है, ब्लकि दूसरा पक्ष मारपीट छोड़कर नियुक्तियों पर सवाल उठा रहा है। यही शिकायत भी अधिकारियों को लिखे पत्र में की गई है। अमूमन रात कि ड्यूटी करने से लोग बचते हैं क्योंकि रात में काम करने वाले लोगों की दिनचर्या अव्यवस्थित रहती है। वह न तो परिवार को समय दे पाते हैं न ही उनकी नींद पूरी हो पाती है। चिड़चिड़ापन सवार रहता है अलग से। ऐसे में रात में ड्यूटी करने को लेकर विवाद होना कई संदेह खड़ा करता है। हालांकि झगड़े की असल वजह तो जांच के बाद ही साफ हो पाएगी।
मेरे हिसाब से होगा काम वरना नहीं
जिला महिला अस्पताल की जिस वार्ड आया पर ठेका महिला कर्मी की पिटाई करने का आरोप लगा है वह कोई आम कर्मचारी नहीं है। बताया जाता है कि विवादों से उसका पुराना नाता है। आरोप है कि समुदाय विशेष की होने की वजह से वह अपने ही समुदाय के लोगों को ड्यूटी पर लगाना चाहती है। उसका आए दिन किसी न किसी से झगड़ा होता है। अस्पताल में वह अपनी तानाशाही चलाना चाहती है। लेबर वार्ड उसका चहिता वार्ड है। अफसरों को सौंपे शिकायती पत्र में आरोपी महिला सरकारी कर्मचारी पर ठेका कर्मियों ने मां की जगह फर्जी तरीके से नौकरी पाने का आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की है। ठेका कर्मियों का कहना है कि इसकी नियुक्ति महिला अस्पताल में इनकी स्वर्गवासी मां की जगह पर दो साल पहले शासन की नियमावली के विरुद्ध हुई है। उनका आरोप है कि वार्ड आया अपनी रहीसी स्टाफ के सामने झाड़ती है और कहती है कि कोई उसका कुछ नहीं कर पाएगा। उसके संपर्क बहुत ऊपर तक हैं। ठेका कर्मियों का कहना है कि आरोपी सरकारी कर्मचारी पर कई मुकदमे भी चल रहे हैं।
सीएमएस बोलीं- लिखित शिकायत मिलेगी तो कराएंगे जांच
मामले में जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ इंदुकांत वर्मा ने कहा कि पीड़िता और अन्य आउटसोर्सिंग कर्मी उनके पास आए थे लेकिन उन्होंने मौखिक शिकायत की, लिखित शिकायत नहीं की। लिखित शिकायत डीएम को दी गई है। जब उनके पास लिखित शिकायत आएगी तो जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।