अमेरिका में भारतीय छात्र की ओर से की गई सोशल मीडिया पर एक पोस्ट उसके ही गले की फांस बन गई। उसे न सिर्फ सजा काटनी पड़ी बल्कि पढ़ाई से भी हाथ धोना पड़ा। अमेरिका के अधिकारियों से हुए समझौते के तहत अब छात्र को भारत भेजा जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 19 वर्षीय छात्र आर्यन आनंद ने कुछ महीने पहले सोशल मीडिया मंच रेडिट पर एक पोस्ट की थी, जिसका शिर्षक था मैंने झूठ की बुनियाद पर अपना जीवन और कॅरिअर बनाया। इस पोस्ट में उसने इस बात की जानकारी साझा की थी कि कैसे उसने फर्जीवाड़ा करके अमेरिका के विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और छात्रवृत्ति हासिल की। पोस्ट में उसने अपनी पहचान उजागर नहीं की थी। हालांकि बाद में उसने यह पोस्ट डिलीट कर दी थी मगर पुलिस की जांच में पाया गया कि यह पोस्ट उसी ने की थी।
पिता की मौत का किया झूठा दावा
पुलिस को जांच में पता चला कि आर्यन ने पेंसिल्वेनिया के लेहाए विश्वविद्यालय में दाखिला पाने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा कराए। एडमिशन और छात्रवृत्ति हासिल करने के लिए उसने अपने पिता की मौत का झूठा दावा किया, जबकि उसके पिता जीवित हैं। जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद आर्यन को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ मजिस्टेरियल डिस्ट्रिक जज जॉर्डन निस्ले की अदालत में मुकदमा चला। अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए एक से तीन महीने की सजा सुनाई, जोकि वह पहले ही जेल में बिता चुका था।
विश्वविद्यालय ने छोड़ी 85 हजार की क्षतिपूर्ति
आर्यन के वकील के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों से हुए समझौते के तहत आर्यन को भारत लौटना होगा। लेहाए विश्वविद्यालय ने छात्र से 85 हजार अमेरिकी डॉलर की क्षतिपूर्ति की मांग नहीं की है। उसे रिहा करके अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया है।