प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश से भागने के बाद शेख हसीना का पहला बयान सामने आया है। बांग्लादेशी मीडिया पर चल रहे बयान के मुताबिक शेख हसीना ने जल्द देश लौटने और हिंसा करने वालों को सजा दिलाने का दावा किया है। उन्होंने इस घटनाक्रम में विदेशी साजिश की ओर भी इशारा किया है। हालांकि इस बयान के अधिकारिक होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है न ही इसका खंडन किया गया है।
सोशल मीडिया पर बंग्ला भाषा में आए इस बयान में कहा गया है कि मैंने इस्तीफा दे दिया। अब आपको तो सिर्फ लाशों का जुलूस देखना है। वे छात्रों की लाशों पर सत्ता हासिल करना चाहते थे, मैंने इसकी इजाजत नहीं दी। मैं सत्ता में जीत कर आई थी। यदि मैंने सेंट मार्टिन और बंगाल की खाड़ी को अमेरिका के लिए छोड़ दिया होता तो मैं सत्ता में बनी रह सकती थी।
बयान में कहा गया कि कृपया खुद का इस्तेमान न होने दें। जो लोग बच्चों की लाशें गिरा रहे हैं, उन्हें सजा मिलेगी। शायद आज वह देश में होतीं तो और अधिक जानें जातीं, अधिक संपत्ति नष्ट होती। इसलिए उन्होंने खुद को हटा लिया।
पार्टी समर्थकों को भी दिया संदेश
बयान में कहा गया है कि जो पार्टी के सहयोगी और वहां हैं, हिम्मत नहीं हारेंगे। अवामी लीग बार-बार खड़ी हुई है। ये आपने कर दिखाया है। निराश मत होइए। वह जल्द ही लौटेंगी। हार उनकी है लेकिन जीत बांग्लादेश के लोगों की है। वे लोग जिनके लिए उनके पिता और परिवार ने अपनी जान दे दी। उन्हें खबर मिली है कि कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है और घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई है।
छात्रों को कभी रजाकार नहीं कहा
बयान में कहा गया है कि उन्होंने युवा छात्रों को कभी रजाकार नहीं कहा। उनके शब्दों को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। सभी से अनुरोध है कि उस दिन का पूरा वीडियो देखें। एक दल ने उन्हें खतरे में डालकर छात्रों का फायदा उठाया है। उन्हें विश्वास है कि एक दिन उन्हें इसका एहसास होगा। दरअसल बांग्लादेश-पाकिस्तान बंटवारे के दौरान रजाकार नाम पाकिस्तान की ओर से क्रूर सेना का गठन किया गया था। जिसने युद्ध के दौरान बांग्लादेशियों पर जमकर अत्याचार किया था। बांग्लादेश में इस शब्द को हिंसक और बेहद अपमानजनक माना जाता है।