पुलिस के मुताबिक अमित और शिखा ने 2007 में प्रयागराज के जार्जटाउन में इंफोकांस कंसलेटेंटस प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली थी। जिसमें अमित प्रबंध निदेशक और उसकी पत्नी शिखा सह निदेशक थी। दोनों ने नौकरी के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी की और फरार हो गए थे। दोनों के खिलाफ प्रयागराज के जार्जटाउन थाने में धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। दोनों लंबे समय से अहमदबाद में छिपकर रह रहे थे।
इंजीनियर की नौकरी के नाम पर करते थे ठगी
पूछताछ में अमित ने पुलिस को बताया कि वह अपनी कंपनी में लोगों से पैसा जमा कराकर साफ्टवेयर डेवलपर और इंजीनियर के पद पर नौकरी देने का झांसा देता था। वेतन के रूप में प्रतिमाह साढ़े आठ हजार रुपये दिए जाते थे। नौकरी पाने वाले हर युवा से सिक्योरिटी मनी के नाम पर 80 हजार से एक लाख रुपये तक जमा कराते थे। नौकरी करने वालों से सर्विस एग्रीमेंट में तीन साल तक कंपनी में काम करने का बॉन्ड भरवाते थे। एग्रीमंट में तीन साल बाद सिक्योरिटी मनी वापस करने के साथ ही छह महीने काम करने के बाद वेतन वृद्धि का झांसा भी दिया जाता था।
6-7 साल से फ्लैट खरीदकर रह रहे थे अहमदाबाद में
सिक्योरिटी मनी के नाम पर लाखों रुपये इकट्ठे करने के बाद दोनों रकम लेकर भाग गए। कुछ समय तक दोनों दिल्ली में रहे, इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर रहने के बाद वह अहमदाबाद चले गए। 6-7 साल से दोनों अहमदाबाद में फ्लैट खरीदकर रह रहे थे। वहां उन्होंने जिमनी साफ्टवेयर के नाम से एक कंपनी खोली, जो मेडिकल से संबंधित साफ्टवेयर डेवलपिंग का काम करती है। दुबई में भी उसका ऑफिस है, जहां पर 12-15 लोग काम करते हैं और विदेशों में मेडिकल कार्य से संबंधित साफ्टवेयर बनाते हैं। पुलिस आरोपियों को अहमदाबाद के अपर जिला सत्र न्यायाधीश की अदालत में पेश करके ट्रांजिट रिमांड लेने के प्रयास में है।