मुख्य वक्ता मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि आज हमारे मुल्क में कोई भी शख्स सस्ती शोहरत हासिल करने के लिए नबी की शान में गुस्ताखी कर देता है। ऐसे लोग समाज और देश की एकता के लिए खतरा है। हाल के दिनों में महाराष्ट्र के किसी शख्स ने नबी करीम पर नाकाबिले बर्दाश्त बातें कही।
धर्म पर गलत बयानबाजी करने वालों के खिलाफ बने सख्त कानून
मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि हुकूमत ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय सुरक्षा उपलब्ध करा देती है। और जो लोग ऐसे समाज के दुश्मन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं तो उल्टे उन्हीं को हुकूमत कानूनी कार्रवाई कर जेल में डाल देती है। घरों पर गैर कानूनी तरीके से बुल्डोजर चला दिया जाता है। इसलिए हम हुकूमत ए हिंद से मांग करते है कि मुल्क में कोई भी शख्स पैगंबर इस्लाम समेत किसी भी धर्म के रहनुमा पर गलत बयानबाजी करता है उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाया जाए।
तेजी से नशे का आदि हो रहा मुस्लिम नौजवान
मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि मुस्लिम नौजवान तेजी से नशे का आदि हो रहा है। हमें अपनी नौजवान नस्ल को इससे बचाना होगा। इसके लिए मां-बाप को ध्यान देने की अधिक जरूरत है। साथ ही सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करना होगा। आज इसके गलत इस्तेमाल के कारण कितने ही नौजवान जेलों में बंद हैं।
समाजिक बुराइयों की वजह से बेटियों के बहक रहे कदम
मुफ्ती समील नूरी ने कहा कि दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों की वजह से हमारी बेटियों के कदम बहक रहे हैं। हाल के दिनों में हमारी कितनी बेटियां गैरों के साथ चली गई। इसकी बड़ी वजह दहेज है। दहेज की जगह बेटियों को विरासत में हिस्सा दें। बेटियां का मां-बाप और भाई खास खयाल रखें। उनकी सही उम्र में शादी कर दें। शादियों में फुजुलखर्ची और गैर शरई रस्में खत्म करने की जरूरत है।
सुब्हानी मियां की सरपरस्ती में हुई कान्फ्रेंस
कॉन्फ्रेंस दरगाह प्रमुख हजरत मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) की सदारत और सय्यद आसिफ मियां की निगरानी में मुल्क भर से आए उलमा की मौजूदगी हुई। दरगाह के नासिर कुरैशी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस का संचालन कारी यूसुफ रजा ने किया। मदरसा मंजर ए इस्लाम के सदर मुफ्ती आकिल रजवी, साउथ अफ्रीका से सूफी कैसर गुमान, मारीशस से सूफी मोइनुद्दीन अल्लाह बख्श, अफ्रीका से पीर नेहाल खोची, नेपाल से मौलाना फूल नेमत रजवी, अंडमान निकोबार से अब्दुल जलील, कफील हाशमी, अफरोज आलम, अख्तर, कारी अब्दुर्रहमान कादरी, इब्राहीम, कारी सखावत हुसैन, कारी इकबाल मुरादाबादी आदि रहे।