शाहजहांपुर के रोजा क्षेत्र के गांव पींग में रहने वाले सुनील कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने कई साल तक सीतापुर रोड स्थित एक राइस मिल में काम किया था। नौकरी के दौरान उन्हें पता चला कि राइस मिल मालिक गेहूं-धान की खरीद में हर साल करोड़ों का घोटाला करके किसानों का हक मार रहा है।
सुनील ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है। सुनील के मुताबिक राइस मिल मालिक पिछले कई सालों से धान खरीद कर बड़े पैमाने पर घोटाला कर रहा है। घोटाले के लिए बहुत लोगों को सीजनल वेतन पर रखा है। ये लोग उसके लिए कथित किसान खोजकर लाते हैं। उन लोगों को 1000 से 1500 रुपये प्रति व्यक्ति देकर खाद्य एवं रसद विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कराया दिया जाता है।
सुनील ने बताया कि पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद तहसील में साठगांठ करके सत्यापन भी करा दिया जाता है। फिर इन लोगों को क्रय केंद्र भेजकर उनका ई-पॉश मशीन पर अंगूठा लगवा दिया जाता है। जब इन लोगों के बैंक खाते में रकम पहुंच जाती है तो राइस मिल मालिक अपनी और अपने रिश्तेदारों की फर्मों के बैंक खातों में सारी रकम ट्रांसफर करा लेता है। कुछ पैसा नकद में लेता है। फिर इसी रकम से पीडीएस का पुराना चावल सस्ते दामों में लेकर उसमें नये चावल मिलाकर सीएमआर के नाम पर सरकारी गोदामों में कर्मचारियों की साठगांठ से उरवा देता है।
कई सालों से चल रहा खेल, निष्पक्ष जांच की मांग
सुनील ने अपने पत्र में कहा कि इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराई जाए ताकि लगभग दो सौ करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हो सके। उन्होंने कहा कि बीते कई सालों से राइस मिल मालिक यह खेल कर रहा है। उनके पास तमाम ऐसे कथित किसानों की सूची है, जिनके पास जमीन नहीं है फिर भी वह धान बेच रहे हैं और उनके खाते में रकम आ रही है। सुनील ने रोजा सहित अन्य क्षेत्रों में ऐसे लोगों के बारे में भी बताया है।
बेरोजगार और रिक्शा चलाने वाले रैकेट में शामिल
सुनील सिंह ने बताया है कि जिनके नाम से फर्जी पंजीकरण कराया जाता है, उनमें विद्यार्थी, छोटे दुकानदार, रिक्शा चालक और बेरोजगार युवा होते हैं। जब इन कथित किसानों के खाते में रकम पहुंचती है तो मिल मालिक उसे अपने रिश्तेदारों आदि के खातों में रकम ट्रांसफर करा लेता है।
जमीन एक बीघा भी नहीं और क्विंटलों से बेच रहे धान
राइस मिल मालिक जिन लोगों को किसान बताकर पंजीकरण कराया है, उनके नाम पर एक बीघा जमीन तक नहीं है, न ही खेती-किसानी से उनका कोई लेनादेना है फिर भी उनके नाम पर हर साल क्विंटलों के हिसाब से धान बेचा जा रहा है। ये ऐसे लोगों हैं जो मजदूरी करके जैसे-तैसे परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर पाते हैं लेकिन 1000-1500 की रकम के लालच में फर्जीवाड़े का हिस्सा बने हुए हैं।
अफसरों का गहरा गठजोड़, निष्पक्ष जांच पर भी सवाल
सुनील ने पत्र में निष्पक्ष जांच की मांग की है मगर उन्होंने निष्पक्ष जांच हो पाना भी मुश्किल बताया है। उनका कहना है कि गेहूं-धान की खरीद में राइस मिल मालिक, अधिकारियों और खरीद एजेंसियों का गठजोड़ रहता है। इसी के चलते घोटाले होते हैं, जिससे असली किसानों को लाभ नहीं मिल पाता। इतने बड़े मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए मगर मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस घोटाले की जांच डिप्टी आरएमओ को दी है। लोगों का कहना है कि इस जांच में केवल खानापूर्ति होगी। निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है।
मामले को निपटाने की कोशिश शुरू
शिकायत के बाद मामले को निपटाने की कवायद तेज हो गई है। शिकायतकर्ता का हर तरह से मुंह बंद करने की कोशिश की जा रही है। उसे जानमाल के नुकसान का भी खतरा है। करोड़ों की हैसियत रखने वाले राइस मिल मालिक की पहुंच बहुत ऊंची है, जबकि शिकायतकर्ता मामूली आदमी है। ऐसे में इस मामले को दबाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए जा सकते हैं।