यह विचार उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने रविवार को शाहजहांपुर के हनुमतधाम स्थित स्वामी विवेकानंद सार्वजनिक पुस्तकालय में सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल के छात्र अग्निज उपमन्यु की संस्कृत व्याकरण पर लिखी पुस्तक के विमोचन के अवसर पर व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि यूपी सरकार संस्कृत के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार संस्कृत के प्रोत्साहन के लिए कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान कर रही है। सरकार संस्कृत शिक्षा देने वाले विद्यालयों में भवनों के पुनर्विकास के लिए 75 प्रतिशत अनुदान दे रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि जो उम्र खेलने की होती है, उसमें संस्कृत व्याकरण पीयूषम जैसी पुस्तक लिखकर अग्निज ने अतुलनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए पांच चीजें स्थान, कर्ता, चेष्टा, कर्म और देव कृपा आवश्यक होते हैं। देव कृपा को छोड़कर सारी चीजें स्वयं मनुष्य के हाथ में होती हैं। इसलिए पुरुषार्थ जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज है, जो व्यक्ति पुरुषार्थ करता है, वह जीवन में इच्छित फल की प्राप्ति कर लेता है।
उन्होंने घोषणा की यदि कोई भी संस्कृत विद्यालय अपनी किसी आवश्यकता के लिए उनसे संपर्क करता है तो वह अपनी विधायक निधि से पांच लाख रुपये की सहायता उस विद्यालय को देंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाषा विज्ञानी, साहित्यकार और जीएफ कॉलेज के हिंदी विभाग के पूर्व प्राध्यापक आचार्य नित्यानंद मुद्गल ने की।
उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा में उसका व्याकरण सबसे महत्वपूर्ण होता है। भाषा की वैज्ञानिकता और उसके स्थिर स्वरूप के लिए व्याकरण का होना आवश्यक है। पाणिनि ने अपनी अद्वितीय मेधा शक्ति से संस्कृत व्याकरण का जो स्वरूप निर्धारित किया, उसने संस्कृत को दुनिया की सर्वाधिक वैज्ञानिक भाषा बना दिया।
नई पीढ़ी का संस्कृत में रुचि लेना सुखद
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एसएस कॉलेज की संस्कृत विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना प्रियदर्शनी ने कहा कि संस्कृत के महान ग्रन्थों में धर्म, दर्शन, विज्ञान, राजनीति, मनोविज्ञान सहित तमाम विषयों के सिद्धांत सूत्र रूप में छिपे हुए हैं। यह सुखद है कि नई पीढ़ी संस्कृत में रुचि ले रही है। हमारे प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में छिपी जानकारी की पुनः खोज हो सकेगी। भारत फिर से विश्व को अपने ज्ञान से आलोकित करेगा।
संस्कृत संसार की सबसे समृद्ध भाषा
एसएस कॉलेज की प्रबंध समिति के सचिव और पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अवनीश मिश्रा ने कहा कि संस्कृत संसार की सबसे समृद्ध भाषा है। सबसे बड़ा शब्दकोश संस्कृत का है। संस्कृत तकनीक की भाषा भी बन गई है। पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटरों को संस्कृत भाषा में बनाने के प्रयास चल रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सहायक संस्कृत भाषा का व्याकरण ही है।
इन लोगों ने व्यक्त किए विचार
कार्यक्रम को आर्य महिला महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ. रानी त्रिपाठी, सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल के प्रबंध निदेशक प्रदीप अग्रवाल, डीएस इंटर कॉलेज के संस्कृत प्रवक्ता रामनयन वर्मा, राजकीय इंटर कॉलेज की प्रवक्ता नेहा मिश्रा और लेखक अग्निज उपमन्यु ने भी संबोधित किया।
इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर डॉ. प्रभात शुक्ला, राजकीय महाविद्यालय बहेड़ी के प्राचार्य डॉ. केके तिवारी, अंकिता कालानी, अजीत यादव, सुनील कुमार, डॉ. प्रबल अग्निहोत्री, अनंत राठौर, सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संजीव अग्निहोत्री, जितेंद्र गुप्ता, रश्मि वर्मा, व्याख्या सक्सेना और मेजर केपी अग्निहोत्री ने किया। अतिथियों ने संस्कृत में योगदान के लिए रामनयन वर्मा और नेहा मिश्रा को अंग वस्त्र और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
दर्जा राज्यमंत्री सुरेंद्र नाथ वाल्मीकि, भाजपा नगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता, पूर्व नगर अध्यक्ष अरुण गुप्ता, भाजपा नेता उपेंद्र पाल सिंह, महेश प्रजापति, वसंत त्रिवेदी, मोहम्मद नफीस खान, बृजेश पांडे, विजय ठाकुर, चंद्रशेखर दीक्षित, इंदु शेखर दीक्षित, सुशील विचित्र, प्रमोद प्रमिल, ओंकार मनीषी, विवेक राज मिश्रा आदि मौजूद रहे।