हिमांशु पटेल, बरेली। बरेली के जोगीनवादा में रविवार रात जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल होने जा रहीं चार अंजुमनों को मौर्य गली से नहीं गुजरने दिया गया। इस पर दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। रात भर हंगामा चला। पुलिस ने डीजे समेत तमाम तामझाम उतरवाए लेकिन फिर भी लोग नहीं माने। पुलिस दोनों पक्ष के लोगों को समझाती रही लेकिन कोई भी मानने को तैयार नहीं हुआ। रात भर हंगामे के बाद सुबह 6 बजे दोनों समुदाय के लोग वहां से हटे।
अंजुमनों में शामिल थी सैकड़ों की भीड़
हर साल जोगीनवादा से चार अंजुमनें मौर्य गली से होकर जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल होने जाती हैं। अमूमन अंजुमन में 20-25 लोग ही शामिल होते हैं लेकिन इस बार एक अंजुमन में करीब 300 लोगों की भीड़ बताई जा रही थी। अंजुमन में भीड़ बढ़ने से पहले ही विवाद की आशंका जताई जा रही थी। जैसे ही अंजुमने मौर्य गली के पास पहुंची, हिंदू समुदाय के लोग गलत परंपरा बताते हुए जुलूस न निकलने देने की जिद पर अड़ गए।
रात तीन बचे तक चला हंगामा
हिंदू समुदाय के लोग मौर्य गली तो मुस्लिम समुदाय के लोग वहां से करीब 150 मीटर दूर कब्रिस्तान के पास डटे थे। दोनों ही तरफ से धार्मिक नारेबाजी की जा रही थी। पुलिसवालों पर भी छींटाकसी और पानी फेंका गया। माहौल गरमाते देख अफसरों ने पीएसी बुला ली। जोगीनवादा में रात तीन बजे तक हंगामा चलता रहा। एएसपी देवेंद्र कुमार और बारादरी इंस्पेक्टर अमित पांडेय दोनों समुदाय के लोगों को समझाने का प्रयास करते रहे लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
मौर्य गली के अंदर चहलपहल करते लोग।
अंदरखाने रची जा रही मौहाल गरमाने की साजिश
जोगीनवादा में रविवार रात की घटना के बाद दोनों पक्ष के कुछ खराफाती माहौल बिगाड़ने की कोशिश में लगे हैं। मौर्य गली में रहने वाले कुछ लोगों ने बताया कि कुछ खुराफाती लोगों को भड़काकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश रहे हैं। यही हाल दूसरे मुस्लिम समुदाय में है। वहां भी कुछ खुराफाती लोगों को भड़काकर शहर का माहौल बिगाड़ना चाह रहे हैं।
मौर्य गली में तैनात पुलिस।
मौर्य गली में छाया सन्नाटा, फोर्स तैनात
रविवार रात की घटना के बाद से जोगीनवादा में तनाव का माहौल बना हुआ है। अफसरों ने पूरे इलाके में पुलिस फोर्स तैनात कर दी है। मौर्य गली में सन्नाटा छाया हुआ है। कुछ ही लोग घरों के बाहर बैठे दिखाई दिए। हालांकि वह भी इस घटना पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थे लेकिन दबी जुबान लोगों ने बताया कि कुछ संगठनों से जुड़े लोग माहौल खराब करने की पूरी कोशिश में जुटे हैं। वे लोगों को भड़का रहे हैं।
पिछले साल मुसलमानों ने नहीं निकलने दी थी कांवड़ यात्रा
इस पूरे विवाद की जड़ वोटबैंक की राजनीति है, जिसमें दोनों ही पक्ष के नेता अंदरखाने अपनी रोटियां सेक रहे हैं, जिसमें पिस आमजनता रही है। पिछले साल मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सावन में हिंदू समुदाय के लोगों को कांवड़ यात्रा नहीं निकालने दी थी। कांवड़ यात्रा निकालने को लेकर पूरे महीने विवाद चला था। उस समय भी कुछ खुराफातियों के माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने पर तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी को लाठीचार्ज कराना पड़ा था। हालांकि उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा मगर उन्होंने बरेली को दंगे की आग में झुलसने से बचा लिया था।