दरअसल मथुरा में इस समय आधारकार्ड बनवाने और संशोधन कराने के लिए लोगों को रात की नींद और दिन का चेन हराम करना पड़ रहा है। मुख्य डाकघर के बाहर महिला-पुरुष अपने छोटे बच्चों को लेकर आधी रात से खिड़की पर लाइन में टोकन लेने के लिए बैठ जाते हैं।
इनमें अधिकांश ग्रामीण महिलाएं अपने छोटे बच्चों के लेकर पहुंच रही हैं। यहां छह बजे से टोकन बांटे जाते हैं। टोकन भी 100 लोगों को ही दिए जाते हैं। इसके चलते कई-कई दिन तक लोगों के नंबर नहीं आते हैं।
बच्चों के साथ डाकघर के बाहर लाइन में लगीं महिलाएं।
आधार कार्ड बनवाने के लिए हो रही जद्दोजहद
थाना बलदेव के गांव खौंदूआ से आधार कार्ड बनवाने के लिए तीन बेटियों को लेकर आई महिला ने बताया कि वह तीन बेटियों मोनिका, गीता और मानसी के साथ तड़के तीन बजे से लाइन में लगी है। इसी तरह नवादा के रहने वाले प्रशांत का कहना है कि वह तीन दिन से लाइन में लगते आ रहे हैं लेकिन उन्हें टोकन नहीं मिल पा रहा। इसी तरह लाइन में लगे कई लोगों ने अपनी परेशानी बताई।
रोजाना 100 लोगों के ही बन पा रहे आधार कार्ड
हेड पोस्टऑफिस में हर रोज 100 लोगों के ही आधार कार्ड बनाए जाते हैं। बाकी लोग अपनी बारी के लिए दूसरे दिन लाइन में लगते हैं, अगले दिन भी टोकन मिल गया तो ठीक वरना फिर वही जद्दोजहद शुरू होती है।
हेड पोस्ट मास्टर रामजी लाल शर्मा ने बताया कि इनमें दूसरे दिन 10 या 15 लोगों को ही शामिल किया जाता है। इसके अलावा दिव्यांग, गर्भवती महिलाओं और सुपर सिटिजन को प्राथमिकता दी जाती है।