Friday, January 30, 2026

राम कथा सुनने से दूर होते हैं सांसारिक कष्ट : प्रेमभूषण महाराज

लेखक: | Category: उत्तर प्रदेश | Published: October 4, 2024

राम कथा सुनने से दूर होते हैं सांसारिक कष्ट : प्रेमभूषण महाराज
बरेली। बरेली के मॉडल टाउन स्थित श्रीहरि मंदिर के कथा मंडप में गंगा समग्र के आह्वान और अरुण गुप्ता के संकल्प से आयोजित पंच दिवसीय श्रीरामकथा का गायन करते हुए पहले दिन प्रेमभूषण महाराज ने व्यासपीठ से यह बातें कहीं।  

प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि राम कथा हमें यह सिखाती है कि इस संसार में रहते हुए हमें अपने लिए क्या करना चाहिए? ऐसा क्या करें जो हमारे जीवन के बाद भी हमारे साथ जाए? जगत का व्यवहार और प्रति, जगत में रहने तक ही है, जाने के बाद उसका कोई अस्तित्व नहीं होता है।

महाराज ने कहा कि श्रेष्ठ व्यक्ति कुछ ऐसी परंपरा छोड़ जाते हैं जो युगों तक अगली पीढ़ी के लोगों का मार्गदर्शन करती है। मनुष्य की श्रेष्ठता इसी में है कि वह अपने तप से अपनी आने वाली पीढ़ी के लोगों को गौरव करने के लिए कुछ न कुछ अवश्य दे जाते हैं।

कामनाओं का मैल मन में पैदा करता है विकार
महाराज ने कहा कि हम जिस युग में जी रहे हैं वहां कोई भी मनुष्य विकारों से दूर नहीं रह पाता है। कामनाओं के मैल मन में तरह-तरह के विकार पैदा करते रहते हैं और इससे मनुष्य का जीवन कष्टमय हो जाता है। अगर हम सहज रहना चाहते हैं और सहज जीना चाहते हैं तो हमारे पास इस कलियुग के मल को काटने और धोने का एकमात्र साधन है श्रीरामकथा।

उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मद और मत्सर आदि विकार कलिमल कहे जाते हैं। इनसे बचने का एकमात्र सहज साधन श्रीरामकथा ही है। मानस में लिखा है कि इस कथा को जो सुनेगा, कहेगा और गाएगा वह सब प्रकार के सुखों को प्राप्त करते हुए अंत में प्रभु श्रीराम के धाम को भी जा सकता है।

सत्य के मार्ग पर चलकर अर्जित धन ही देता है सुख
महाराज ने कहा कि सत्य मार्ग पर चलकर धन अर्जित करने वाले लोग ही शाश्वत सुख की प्राप्ति कर पाते हैं। छल प्रपंच से धन तो अर्जित किया जा सकता है लेकिन उससे सुख की प्राप्ति कदापि संभव नहीं है। अधर्म के पथ पर चलकर धन अर्जित करने वाले जीवन में कभी भी सुखी नहीं हो सकते हैं। दूसरों को वह दूर से सुखी तो दिखते हैं लेकिन वास्तव में वह सुखी होते नहीं हैं। अगर उनके दिल का हाल जाना जाए तो पता चलता है कि उनके दुख की कोई सीमा नहीं है। 

भगवान से प्रेम की अपेक्षा करना व्यापार
महाराज ने कहा कि भगवान को केवल और केवल प्रेम ही प्यारा है। बार-बार मानस में इसकी चर्चा आई है। यह जरूरी नहीं है कि भगवान भी हमसे प्रेम करें। परंतु हमें भगवान से अवश्य प्रेम करना चाहिए । अगर हम भगवान से प्रेम की अपेक्षा करते हैं तो यह व्यापार हो जाएगा लेनदेन का व्यापार। भगवान से बदले में कुछ चाहना तो व्यापार ही है।

इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक चालक शशांक भाटिया,  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश अग्रवाल,  डीएम रविंद्र कुमार, उच्च शिक्षा आयोग के सदस्य डॉ राधाकृष्ण दीक्षित, महिला आयोग की सदस्य पुष्पा ने पंच दीप जलाए। व्यासपीठ का सपत्नीक पूजन यजमान अरुण गुप्ता ने किया। 

ये रहे मौजूद
रामकथा में केसी गुप्ता (सीए), कृष्ण कुमार मोहता, राजकुमार अग्रवाल, डॉ. शालिनी माहेश्वरी, राजेश कुमार, सतीश खट्टर, रवि छाबड़ा, अश्विनी ओबरॉय, सुशील अरोड़ा, डॉ रविशंकर सिंह चौहान, अमित शर्मा भाग, अखिलेश सिंह आदि मौजूद रहे।

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