फोरेंसिक विभाग अध्यक्ष ने भी नहीं सिखाए पोस्टमार्टम
मेडिकल कॉलेज में तैनात फोरेंसिक विभाग अध्यक्ष पर यह जिम्मा होता है कि वह छात्रों को पोस्टमार्टम सिखाएं लेकिन यहां फोरेंसिक एक्सपर्ट को पोस्टमार्टम प्रक्रिया से कोई मतलब नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां तैनात फोरेंसिक विभाग अध्यक्ष डॉक्टर नेहा सिंह ने अपने आठ साल के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज में कोई पोस्टमार्टम नहीं किया है।
कई बार विवादों में घिरी रही हैं डॉक्टर नेहा
फोरेंसिक विभाग के अध्यक्ष बनने से पहले डॉक्टर नेहा सिंह पर वार्डन का चार्ज था तो उस वक्त उनके ऊपर टेंडर में घपला करने, छात्रों से अभद्र व्यवहार करने, अवैध वसूली जैसे आरोप लगे थे लेकिन प्राचार्य डॉ. एनसी प्रजापति से नजदीकियां होने की वजह से वह कार्रवाई से बचती रहीं। इसके अलावा एक कैंटीन संचालक से भी कमीशन मांगने को लेकर विवाद हुआ था। डॉक्टर नेहा ने कैंटीन संचालक से अभद्र व्यवहार किया था जिसका वीडियो सामने आने के बाद कैंटीन संचालक ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
भविष्य में पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर उठते रहेंगे सवाल
मेडिकल कॉलेज में बिना पोस्टमार्टम सिखाए तैयार किए जा रहे डॉक्टर आने वाले दिनों में इस प्रक्रिया पर भी सवाल उठवाएंगे। पोस्टमार्टम न सीख पाने की वजह से वह किसी की मौत की वजह हत्या को हादसा तो हादसे को हत्या दर्ज कर सकते हैं। मेडिकल लाइन से जुड़े लोग भी आगे की बात सोचकर चिंतित हैं, क्योंकि जो भी डॉक्टर सरकारी सेवा में जाएगा उसे पोस्टमार्टम करना ही होगा। ऐसे में अभी से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार का कहना है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया सिखाए जाने के लिए जिला अस्पताल प्रबंधन से सहयोग मांगा गया है।