जिले के गंजडुंडवारा कस्बे की कुवा जामा मस्जिद में आयोजित बैठक में जुलूस-ए-मोहम्मदी (ईद-मिलादुन्नबी) को लेकर अहम फैसले लिए गए। बैठक की शुरुआत कुरान शरीफ की तिलावत से हुई। इसके बाद उलमा-ए-किराम ने जुलूस को पूरी तरह इस्लामी तरीके से निकालने पर जोर देते हुए डीजे और पटाखों पर सख्त पाबंदी लगाने का एलान किया। सभी उलमा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नबी की यौमे पैदाइश पर जुलूस-ए-मोहम्मदी पूरी पवित्रता और अनुशासन के साथ निकाला जाना चाहिए। किसी भी तरह की खुराफात, विशेषकर डीजे बजाना और पटाखे छोड़ना, जुलूस की रूहानियत के खिलाफ है।
मौलाना जैनुल आबेदीन बरकाती ने भावुक होते हुए कहां नबी के जुलूस की बरकतें और खुराफात दोनों एक साथ नहीं हो सकतीं। अगर हम जुलूस में खुराफात करेंगे तो नबी खुश नहीं होंगे, बल्कि तकलीफ पहुंचेगी।"उन्होंने सभी से अपील की कि जुलूस इस अंदाज में निकाला जाए कि किसी इंसान को किसी तरह की तकलीफ न पहुंचे। जुलूस में सिर्फ नबी के नारे लगें, सलातो सलाम और दुआओं से ही उसका समापन हो।
कमेटी ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि इस साल से जुलूस-ए-मोहम्मदी में डीजे नहीं बजाया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति डीजे लाएगा तो उसे जुलूस में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। इस मौके पर न ही आतिशबाजी जलाई जाएगी। बैठक भावनात्मक माहौल में समाप्त हुई, जहां उलमा की नसीहतें सुनकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
बैठक में जुलूस कमेटी के सरपरस्त मौलाना जैनुल आबेदीन बरकाती, मौलाना नसीमुद्दीन, मौलाना रियाज अख्तर मिस्बाही, मौलाना अब्दुल सुभान, कारी जुल्फिकार, मौलाना रियाजुद्दीन, कारी आरिज, कारी अतीक बरकाती, हाफिज मुफीद राजा, मौलाना मुफीद आलम, कारी जावेद, जनाब रईस अहमद तथा जुलूस कमेटी के सदर गुड्डू भाई समेत अन्य लोग मौजूद रहे।