जागरण टुडे, कासगंज
यूपी में भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अब वे श्मशान घाट और समाधि स्थलों पर भी कब्जा करने से बाज नहीं आ रहे। ऐसा ही मामला सोरों के बदरिया क्षेत्र में सामने आया, जहां संत काशी गिरी की समाधि पर कब्जे का प्रयास किया गया।
बदायूं जिले की रहने वाली चंद्रवती, पुत्री नबाब सिंह ने बताया कि उनके चाचा संत काशी गिरी का नवंबर 1967 में निधन हो गया था। उनका पालतू हाथी हरिया अचानक पागल हो गया और उसने ही संत को मार दिया। इसके बाद पीएसी के जवानों ने हाथी को भी गोली मार दी थी। दोनों का अंतिम संस्कार उनके गुरु गणेश गिरी महाराज ने हरि की पौड़ी स्थित गाटा संख्या 574 पर कराया और वहीं समाधि बनवाई। यह परंपरा रही है कि हर वर्ष अगहन मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को नागा साधु-संत ढोल नगाड़ों के साथ वहां चिलम चढ़ाते हैं।
चंद्रवती ने जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में कहा कि मोहल्ला बारू के अभय निर्भय और सोनू निर्भय ने जेसीबी मशीन से समाधि को क्षतिग्रस्त कर कब्जा करने की कोशिश की। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट तक की नौबत आ गई। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पास के गाटा संख्या 575 को फर्जी तरीके से खरीदा था, जो पहले ही स्टांप चोरी के चलते निरस्त घोषित किया जा चुका है।
इस पूरे मामले को लेकर संतों का आक्रोश बढ़ गया। चंद्रवती और साधु-संतों ने जिलाधिकारी प्रणव सिंह से मुलाकात कर समाधि स्थल को कब्जामुक्त कराने और जीर्णोद्धार कराने की मांग रखी। डीएम ने शिकायतकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि जल्द ही समाधि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा और धार्मिक परंपरा को संरक्षित किया जाएगा।