जागरण टुडे, गंजडुंडवारा (कासगंज)
नगर में जलभराव की समस्या जस की तस है। ध्वस्त हुए ड्रेनेज सिस्टम के चलते जरा सी बारिश से ही शहर के तमाम मोहल्ले व गलियां ताल-तलैया बन जाती हैं। बारिश के चलते जलमग्न हुए रास्तों का पानी घरों में भी घुसने लगता है। अंग्रेजों के जमाने की ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव आजादी के 78 साल बाद भी नहीं हुआ है। शहर में ड्रेनेज सिस्टम बदलने के लिए कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। आज भी शहर की ड्रेनेज व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने की है।
ड्रेनेज सिस्टम सुधारने के लिए पालिका बोर्ड की बैठकों में यह मुद्दा उठाया जाता रहा है। विपक्ष के कमजोर होने या फिर मिलीभगत के चलते यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़कर रह जाता है। बाजारों से लेकर बस्तियों तक में आज भी जलभराव की समस्या बनी हुई है। समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिए जाने से लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
अंग्रेजों के जमाने की ड्रेनेज व्यवस्था गंजडुंडवारा में शहर की ड्रेनेज व्यवस्था ब्रिटिश काल में तैयार कराई गई थी। इसमें कादरगंज रोड स्थित तालाब में शहर का पानी एकत्रित होता था। यहां से इस पानी को नालों के माध्यम से शहर के बाहर निकाला जाता रहा। तालाब तक पानी लाने के लिए करीब पांच फीट नीचे खुल नाले बनाए गए थे। ये नाले हनुमान गढी चौराहा, लालकुआ, मोहल्ला मंसूर, इमाम वक्श, कादरगंज रोड की बस्तियों से विभिन्न स्थानों पर चार चार फुट पानी भर जाता है। दुकानो और घरों में भी पानी भर जाने शहर वासियो को नुकसान उठाना पडता है।
पालिका का नहीं है इस ओर ध्यान
1964 में दूसरी बार पड़ी सीवेज लाइनअंग्रेजों की ड्रेनेज व्यवस्था दस हजार की आबादी को लेकर बनी थी। तालाब का भी स्वरूप अब खत्म हो गया है। नगर पालिका की ओर से नई सीवेज व्यवस्था पर कोई कार्य नहीं हुआ है। हर साल नालों की सफाई पर लाखों रुपये का बजट बंदरबांट में ही चला जाता है। कचरा भरने से अटे नाले-नालियों का पानी उफनकर शहर में जलभराव की समस्या पैदा कर रहा है।