बरेली में चल रही आरडीएसएस योजना के तहत तीन ठेकेदारों पर 53 लाख रुपये की विद्युत सामग्री गायब करने का आरोप। यूनिवर्सल एमईपी इंजीनियरिंग एंड सर्विसेस लिमिटेड (UMEPSL) के प्रोजेक्ट मैनेजर धीरेन्द्र सिंह ने तीन ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपी ठेकेदारों में दो अमरोहा और एक गाजियाबाद का रहने वाला है। प्रेमनगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद मामले की जांच शरू कर दी है।
यूनिवर्सल एमईपी इंजीनियरिंग एंड सर्विसेस लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर धीरेन्द्र सिंह के अनुसार आरडीएसएस/ लॉस रिडक्शन योजना के तहत बरेली में विद्युत परियोजना चल रही है।उन्नाव के अचलगंज निवासी धीरेंद्र सिंह ने पुलिस को बताया कि कंपनी को क्लस्टर-6 क्षेत्र में काम सौंपा गया है। इसके तहत ठेकेदारों को कंपनी के स्टोर (ग्राम अहलादपुर, पुलिस चौकी के सामने) से विद्युत सामग्री दी गई थी। नियम के अनुसार, काम पूरा होने पर बची हुई और डिस्मेंटल की गई सामग्री स्टोर में लौटाना अनिवार्य है।
कंपनी का आरोप है कि कोतवाली क्षेत्र के आलमगीरीगंज, बिहारीपुर, सिविल लाइन, डीडीपुरम और एकता नगर क्षेत्रों में काम करने वाले तीन ठेकेदारों ने सामग्री स्टोर में लौटाने के बजाय गायब कर दी। आरोपी ठेकेदारों में एचएस इलेक्ट्रिकल के हरवीर सिंह पुत्र परशुराम निवासी ग्राम घरोट अमरोहा, अक्की इंटरप्राइजेज के आकाश कुमार पुत्र हरिओम सिंह निवासी दुर्गापुरी अमरोहा और रविंद्र इंटरप्राइजेज के रविंद्र सिंह पुत्र राम निवास निवासी गाजियाबाद हैं।
धीरेंद्र सिंह के मुताबिक कंपनी ने मौखिक, लिखित और विधिक नोटिस देकर कई बार सामान वापसी की मांग की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि ठेकेदारों ने जानबूझकर सामग्री रोक ली है। इन ठेकेदारों को जारी की गई सामग्री का की अनुमानित कीमत एचएस इलेक्ट्रिकल पर 15,79,423 रुपये, अक्की इंटरप्राइजेज पर 6,61,069 और रविंद्र इंटरप्राइजेज 31,12,013 यानी तीनों पर मिलाकर कुल: 53,52,505 रुपये का है। कंपनी का कहना है कि सामग्री नहीं लौटाने से न केवल भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का कार्य भी समय पर पूरा नहीं हो सका।