जागरण टुडे, मथुरा
यमुना नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने जिला बाढ़ योजना समिति की आपात बैठक बुलाई। बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए।
डीएम ने उप-जिलाधिकारियों को गांव-गांव जाकर बैठकें करने और ग्राम स्तर पर बहु-विभागीय टीमें गठित करने के निर्देश दिए। इनमें पंचायती राज, स्वास्थ्य, राजस्व, पुलिस, पशुपालन, विद्युत और विकास विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी बाढ़ शरणालयों में स्वास्थ्य टीमें, एंबुलेंस और डॉक्टर तैनात किए जाएं। मेडिकल कैंप में एंटी स्नेक वेनम और एंटी लार्वा छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। पशु चिकित्सा विभाग को पशुओं के लिए चारा, भूसा और पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने और बड़ी गौशालाओं में उन्हें शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए। इस बार लगभग 10 हजार पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
जिला पूर्ति अधिकारी को बाढ़ प्रभावित इलाकों में राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश मिले। शरणालयों में भोजन, पेयजल, साफ-सफाई, मोबाइल टॉयलेट, मेडिकल टीम और बिजली की व्यवस्था की जाएगी। सिंचाई विभाग को यमुना जलस्तर पर लगातार नजर रखने और समय-समय पर प्रशासन को सूचना देने के निर्देश दिए गए। पुलिस विभाग को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों और सड़कों पर बैरिकेडिंग करने तथा नाव/स्टीमर में बेसिक सेफ्टी इक्विपमेंट अनिवार्य करने को कहा गया।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि आगामी 4 से 6 सितंबर के बीच यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास हो सकता है, इसलिए परिवारों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की तैयारी प्राथमिकता पर की जाए। बैठक में अपर जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम अधिकारी, जिला विकास अधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।