अखिल भारतीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में आयोजित अभा श्री स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन एवं संगीत कला रत्न समारोह में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शास्त्रीय संगीत कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर गीत, संगीत एवं नृत्य की त्रिवेणी में श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व राज्यपाल राजस्थान कलराज मिश्र ने संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया। उन्होंने कहा कि स्वामी हरिदास ने अपनी संगीत साधना के माध्यम से जहां ठाकुर बांकेबिहारी को प्रकट किया, वहीं भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक नई पहचान दी। कार्यक्रम में पंडित प्रभाकर नारायण मल्लिक ने ध्रुपद गायन कर गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की भावमयी प्रस्तुति दी।
पंडित प्रभाकर नाराण ने अपनी गायकी के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सरोद वादक मुकेश शर्मा ने अपने चिरपरिचित अंदाज में ऐसी तान छेड़ी कि श्रोता भावविभोर हो गए। पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री नलिनी कमलिनी ने ठाकुर जी की बाल लीलाओं और राधा कृष्ण की होली लीला का बड़ा ही मनोहारी मंचन किया, जिसमें उनके नृत्य कला की गहनता और निपुणता झलक रही थी। कथक प्रस्तुति को देखकर पूरा परिसर तालियों की गूंज से गुंजायमान हो उठा।
संस्था अध्यक्ष करन कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक की गहराइयों को छूने वाला एक पवित्र आयोजन है। स्वामी हरिदास जी के जीवन और उनके संगीत को समर्पित यह समझ भक्ति भाव काल और साधना का संगम है। इस अवसर पर उपाध्यक्ष बिहारीलाल वशिष्ठ, संयोजक आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, बलराम आचार्य, हरिकृष्ण शर्मा, कृष्णमुरारी शर्मा, नकुल शर्मा, प्रदीप गोस्वामी, अरविंद गोस्वामी, बालकृष्ण शर्मा बालो, अनिल शास्त्री, रामबाबू शर्मा आदि मौजूद रहे।