जागरण टुडे, वृंदावन (मथुरा)
ठा. श्रीराधा सनेह बिहारी मंदिर में आयोजित श्री स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन एवं संगीत कला रत्न समारोह में प्रस्तुति देने आए कलाकार पत्रकारों से भी रूबरू हुए। ध्रुपद गायक डॉ. प्रभाकर नारायण पाठक मल्लिक ने कहा कि स्वामी हरिदास जी ईश्वर के रूप में संत हैं। आज उनके आविर्भाव महोत्सव में मुझे प्रस्तुति देने का मौका मिला है, उसके लिए मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को ध्रुपद गायन से जोड़ने के लिए हम लोग छोटे बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
सरोद वादक मुकेश शर्मा ने कहा कि आज वे स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन में प्रस्तुति देने आए हैं, यह उनके लिए बहुत बड़ा अवसर है। साथ ही उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत हमारी ऐसी धरोहर है, जो कभी खत्म नहीं हो सकती। काफी युवा भी इससे जुड़े हुए हैं और रुचि ले रहे हैं। हमारी यह विधा देश ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय हो रही है।
पद्मश्री कथक नृत्यांगना नलिनी कमलिनी ने कहा कि वे दोनों बहनें बनारस घराना शैली के कथक को लोकप्रिय बनाने का हरसंभव प्रयास करती हैं। साथ ही बताया कि उन्होंने वर्ष 1979 में ठा. बांकेबिहारी के गर्भगृह में नृत्य किया था, यह हमारे लिए बहुत सम्मान का समय था। यह एक विलक्षण बात थी, क्योंकि अंदर ठाकुर जी के समक्ष नृत्य व गायन की अनुमति नहीं थी। इतनी उम्र में भी अच्छे ढंग से प्रस्तुति देती हैं के जबाब में उन्होंने कहा कि कला का एक स्वरूप है, उसकी आयु कला से ही होती है। अगर कला जीवंत है तो वो जवान है।