कार्यक्रम में प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित चेतन जोशी ने अपने खास अंदाज में बांसुरी की ऐसी धुन छेड़ी, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को कृष्णभक्ति में डुबो दिया। जब उन्होंने श्रीकृष्ण भजनों की तान छेड़ी तो पूरा सभागार गूंज उठा और श्रोताओं ने तालियों से उनका स्वागत किया।
इसके बाद तबला वादक हरिमोहन शर्मा और तबला-पखावज वादक ललित मोहन शर्मा ने अद्भुत जुगलबंदी प्रस्तुत की। उनकी संगति ने शास्त्रीय संगीत की गहराई और लयबद्धता का ऐसा परिचय कराया कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। ताल और स्वर की इस अनूठी संगति ने सम्मेलन की गरिमा को और ऊंचा कर दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि राज्यमंत्री सुनील भराला सहित महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. आदित्यानंद महाराज, संस्था अध्यक्ष करन कृष्ण गोस्वामी, उपाध्यक्ष बिहारीलाल वशिष्ठ, संयोजक आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, अनिल शास्त्री और सैकड़ों संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन संतों और विद्वानों के आशीर्वचन तथा दर्शकों की उत्साही सहभागिता के बीच हुआ। इस सम्मेलन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि शास्त्रीय संगीत की परंपरा आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही जीवंत और लोकप्रिय है।