जागरण टुडे, मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पर रविवार को बड़ा कदम उठाया गया। आगरा स्थित गुरु का ताल गुरुद्वारा में आयोजित भारत रक्षा मंच के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण का प्रस्ताव रखा।
संगठन की राष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ मंत्री बीना गोगरी ने प्रस्ताव का अनुमोदन किया। इसके बाद देशभर से आए पदाधिकारियों ने दोनों हाथ उठाकर ॐ का उच्चारण किया और प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया। इस दौरान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणजीत सिंह सांगले ने भी न्यास के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। अधिवेशन में "कृष्ण लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे" और "आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी" के नारे गूंजे, जिससे सभागार में उत्साह और आस्था का माहौल छा गया।
सत्र आरंभ होने से पहले महेंद्र प्रताप सिंह ने मंच के राष्ट्रीय संयोजक सूर्यकांत केलकर से मुलाकात की। करीब 20 मिनट चली वार्ता का मुख्य विषय श्रीकृष्ण जन्मभूमि को कब्जामुक्त कराकर मंदिर निर्माण रहा। इसके अलावा हिंदू समाज को जागरूक करने पर भी गहन चर्चा हुई।
सभा को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र राज वज्रनाभ द्वारा बनवाए गए मंदिर को आक्रांताओं ने कई बार तोड़ा। उन्होंने बताया कि मुगल शासक औरंगजेब ने तो यहां तक कि भगवान के विग्रहों को मथुरा से हटाकर आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में जड़वा दिया था। सिंह ने कहा कि इसी कारण उन्होंने न्यायालय में मुकदमा दायर किया है, जिसमें मस्जिद हटाकर गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण और विग्रहों को पुनः मथुरा लाने की मांग की गई है।
सिंह ने कहा कि हमारे पास इस मुकदमे को जीतने के पुख्ता सबूत हैं। "दुनिया की कोई ताकत हमें रोक नहीं सकती। हम सबके सहयोग से अवश्य ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण करेंगे।" इस अवसर पर वृंदावन के संत पंडित श्यामानंद महाराज, मनोज चौधरी और भारत रक्षा मंच की सुजेनानंद सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।