बरेली। हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day – WSPD) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिबद्धता और कार्रवाई सुनिश्चित करना है। वर्ष 2003 से यह दिवस दुनिया भर में अलग-अलग गतिविधियों के साथ आयोजित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या करना एक गलत और खतरनाक कदम है, जो अत्यधिक हताशा और निराशा की स्थिति में व्यक्ति उठाता है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे डिप्रेशन, एंज़ाइटी, आर्थिक या पारिवारिक तनाव। रिपोर्ट के अनुसार, आत्महत्या का विचार पैदा होना मस्तिष्क में होने वाले बायलॉजिकल बदलाव का परिणाम है। सही समय पर इलाज और परामर्श से इसे रोका जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि हर साल करीब 7 लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। भारत में भी यह आंकड़ा चिंताजनक है। एनसीआरबी रिपोर्ट 2021 के अनुसार 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की। 2022 में यह संख्या 1,70,000 से अधिक रही।भारत में आत्महत्या की दर प्रति 1 लाख जनसंख्या पर 12.4 दर्ज की गई है।
आत्महत्या के प्रमुख कारण
पारिवारिक समस्याएं – 23% मामले
बीमारी (मानसिक व शारीरिक) – 23% मामले
शादी से जुड़ी समस्याएं (दहेज विवाद, तलाक आदि)
आर्थिक संकट और कर्ज का बोझ
शैक्षणिक दबाव – विशेषकर छात्रों में
नशे की प्रवृत्ति और पारिवारिक कलह
बढ़ती आत्महत्या दर और युवा वर्ग
एनसीआरबी के अनुसार 2011 से 2021 के बीच आत्महत्या की दर में 7.14% की वृद्धि दर्ज की गई। एक अन्य अध्ययन बताता है कि खासकर 15 से 29 वर्ष के युवाओं में यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। उदासी, अकेलापन और डिप्रेशन इसके पीछे बड़ी वजह हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि किसी मित्र, परिवार के सदस्य या युवा में निराशा या अवसाद के लक्षण दिखाई दें, तो उनसे संवाद बनाए रखें, उन्हें मनोचिकित्सक को दिखाएं। सुरक्षित और असरदार दवाइयों के साथ-साथ भावनात्मक सहयोग आत्महत्या रोकने में बेहद मददगार हो सकता है। इस पर समाज और सरकार दोनों को मिलकर इस समस्या पर काम करना होगा। जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच ही इसका समाधान है।
लेख- संजीव मेहरोत्रा, महामंत्री बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन