बरेली। संयुक्त राष्ट्र हर साल 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस (International Day of Democracy) के रूप में मनाता है। इस दिन का उद्देश्य लोकतंत्र के महत्व को रेखांकित करना और नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। संयुक्त राष्ट्र इस अवसर पर सभी सरकारों से लोकतंत्र के सिद्धांतों को बढ़ावा देने और उन्हें बनाए रखने का आग्रह करता है।
लोकतंत्र दिवस का इतिहास
लोकतंत्र दिवस की जड़ें लोकतंत्र पर सार्वभौमिक घोषणा में हैं, जिसे 15 सितंबर 1997 को अंतर-संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union) द्वारा अपनाया गया था। इसके बाद 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आधिकारिक रूप से 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तब से यह दिन हर साल दुनिया भर में लोकतंत्र के मूल्यों को सशक्त करने के लिए समर्पित है।
लोकतंत्र दिवस का उद्देश्य
इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र की प्रासंगिकता और नागरिक अधिकारों के महत्व को समझाना है। यह सरकारों और नागरिकों को प्रेरित करता है कि वे लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को न केवल बनाए रखें बल्कि उन्हें और अधिक मजबूत बनाएं।
लोकतंत्र का महत्व
लोकतंत्र एक ऐसी शासन प्रणाली है जिसमें जनता को अपने प्रतिनिधियों को चुनने और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों में भाग लेने का अधिकार होता है। यह न केवल मानवाधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि कानून के शासन और पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करता है।
बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। स्वतंत्र मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह देश में लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने और जनता को जागरूक करने में अग्रणी भूमिका निभाए। अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह नागरिकों और सरकारों को उनके साझा दायित्वों की याद दिलाने का अवसर भी है।
लेखक- संजीव मेहरोत्रा, महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन