उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जी.एल.ए. विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को सांझी महोत्सव-2025 का शुभारंभ रसखान समाधि परिसर में हुआ। दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत परिषद के एसीईओ मदन चंद्र दुबे, गीता शोध संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना और ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा ने की।
एसीईओ दुबे ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य ब्रज की प्राचीन सांझी कला को पुनर्जीवित करना और नई पीढ़ी को ब्रज संस्कृति से जोड़ना है। महोत्सव के पहले दिन रंग-बिरंगी जल सांझी, सूखे रंगों की सांझी, गोबर सांझी, पोर्ट्रेट चित्रांकन और रंगोली ने सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में कलाकार कमलेश्वर, खुशबू उपाध्याय, श्रुति यादव, विश्वजीत, बृज गोपाल सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों जैसे दक्ष एजुकेशन इंस्टीट्यूट और खाजानी वूमंस इंस्टीट्यूट समिति के विद्यार्थियों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों ने रंगोली बनाकर अपने-अपने विद्यालयों के नाम उकेरे और परिसर को रचनात्मकता से भर दिया।
महोत्सव में महावन, बलदेव, राया, टाउनशिप, लोहवन और लक्ष्मीनगर के विद्यालयों से भी छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। शाम की द्वितीय पाली में भजन संध्या और कथक नृत्य का भव्य आयोजन हुआ, जिसने कार्यक्रम को और आकर्षक बना दिया।
इस अवसर पर सहायक अभियंता दूधनाथ यादव, सुनील शर्मा समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। गीता शोध संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने बताया कि महोत्सव 21 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित होगा। प्रत्येक दिन अलग-अलग शैली की सांझी बनाई जाएगी।
विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से अपील की गई कि वे छात्रों को समूहों में भेजकर सांझी कला की पारंपरिक विधियाँ देखें और सीखें। यहां बच्चे अपनी रचनात्मक कला का स्वतंत्र प्रदर्शन कर सकेंगे। यह आयोजन ब्रज संस्कृति और सांझी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।