पंडित हर प्रसाद पाठक स्मृति साहित्यकर सम्मान समिति द्वारा आयोजित साहित्यकर सम्मान समारोह रविवार को गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी, मथुरा में बड़े ही भव्य और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कुल 42 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान में रासलीला का प्रशिक्षण ले रहे बच्चों और बालिकाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों से हुआ। सरस्वती वंदना और अभिनंदन गीत ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इन प्रस्तुतियों की परिकल्पना और निर्देशन संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना ने किया।
संगीत संयोजन में आकाश शर्मा (हारमोनियम), मनमोहन कौशिक (पखावज), दीनदयाल (बांसुरी) और सुनील शर्मा (तबला) का योगदान रहा, जबकि वस्त्र-विन्यास का संयोजन रितु ने किया। लगभग दस बालिकाओं ने सामूहिक रूप से संगीतमय प्रस्तुतियाँ दीं, जिससे समारोह का माहौल और भी भव्य बन गया।
इस अवसर पर ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा ने साहित्यकारों को संबोधित करते हुए ब्रज की सांस्कृतिक धरोहर और उसके संरक्षण पर विचार रखे। गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने अपने व्याख्यान में सनातन धर्म, संस्कृति के महत्व तथा उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं गीता शोध संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी।
संस्थान के निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना ने साहित्यकारों को संस्थान की वार्षिक गतिविधियों और उपलब्धियों से भी अवगत कराया। सम्मानित साहित्यकारों ने गीता शोध संस्थान और रासलीला अकादमी की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन ब्रज संस्कृति के संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल है।
समारोह के अंत में समिति की ओर से सभी साहित्यकारों को सम्मानित किया गया और उनके योगदान को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।