प्राचीन ब्रह्मकुंड पर जीएलए विश्वविद्यालय, द ब्रज फाउंडेशन एवं ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय सांझी मेला के अंतिम दिन रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। साथ ही कला का प्रदर्शन करने वाले कलाकार सम्मानित किए गए।
ब्रज फाउंडेशन के संस्थापक विनीत नारायण ने कहा कि ब्रह्मकुंड पर सांझी मेला अथक प्रयासों से प्रारंभ किया गया था। यह कलाकारों और साधकों की मेहनत एवं वृंदावनवासियों का ही स्नेह है, जो यह मेला आज उच्चतम सोपान पर है। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने कहा कि साधाना से जन्मी सांझी कला वृंदावन का गौरव है। संस्थान के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज देश-विदेश में सांझी को लोग जानने लगे हैं और इस विषय पर शोध कार्य कर रहें हैं।
गोवर्धन नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन जगपाल चौधरी ने कहा कि ब्रज की प्राचीन सांझी कला का विस्तार तथा युवाओं को इस कला को सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जगदीश शर्मा गुरु ने कहा कि सांझी मात्र कला का प्रदर्शन नहीं बल्कि इसमें उपासना तत्व भी समाहित है। मंदिर श्रीधाम गोदा विहार पीठाधीश्वर शाश्वत आचार्य, सुरेशचंद्र शर्मा, अतुल श्रीवास्तव, राघव भारद्वाज, बंटू गौतम, बंशी तिवारी, जेपी सारस्वत, आरएन शर्मा आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
वहीं सांझी प्रतियोगिता एवं रंगोली प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। निर्णायक की भूमिका प्राणवल्लभा दीदी ने निभाई।
इस अवसर पर विश्वजीत दास, ब्रजगोपाल चित्रकार, कमलेश्वर शर्मा, यश सोनी, प्रीति चौहान, दीपाली कुलश्रेष्ठ, मुदिता शर्मा, अनन्या गुप्ता, राधामोहन सैनी, आनंद यादव, जगदीश आदि उपस्थित थे।