Friday, January 30, 2026

Shahjahanpur News: हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, पालकी में बैठकर प्रस्थान करेंगी

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: September 20, 2025

Shahjahanpur News:  हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, पालकी में बैठकर प्रस्थान करेंगी

सोमवार 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरूआत हो रही है। अबकी बार मां दुर्गा पर सवार होकर आएंगी। नवदुर्गा का हाथी पर आना समस्त जनमानस के लिए विशेष हितकरी होने का संकेत है। सबसे श्रेष्ठ बात तो यह है कि इस बार अधिकतर लोगों के अन्दर यह भाव उत्पन्न होता है कि नवरात्रि व्रत इस वर्ष दस दिन के हो रहे हैं । वहीं, नवरात्रि का समापन गुरुवार  02 अक्टूबर को विजयादशमी पर होगा। इसलिए मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी।
 
दुर्गा मंदिर के आचार्य अरूण कुमार शुक्ला ने बताया कि शास्त्रीय मतानुसार व्रत सदैव नौ रातों का ही करना चाहिए। हर मनुष्य कहता है कि इस समय हमारा नवरात्रि व्रत चल रहा है, परन्तु सदैव आठ रात्रि ही व्रत पूजन करके नौवें दिन नवमी को कन्या खिलाकर स्वयं भोजन ग्रहण कर लेते हैं, जबकि नवरात्रि व्रत पारण सदैव दसवें दिन ही करना चाहिए। सोमवार से मंगलवार तक लगातार व्रत बुधवार नवमी को कन्याभोज करवाकर व्रत का पारण कर लेना श्रेयस्कर होगा, तभी नवरात्रि पूर्ण होगी।

इस बार महाष्टमी व्रत 30 सितंबर और महानवमी व्रत एक अक्टूबर को एवं विजयदशमी का पर्व दो अक्टूबर को मनाया जाएगा। वहीं, नवरात्र को लेकर केरूगंज, सदर बाजार, रोजा सहित जिले की सभी प्रमुख बाजारों में सामिग्री और अन्य वस्तुओं की खरीददारी के लिए भीड़ उमडऩे लगी है। मंदिरों और घरों में सफाई अभियान चलाया जा रहा है। साज-सज्जा शुरू हुई। 

कलश स्थापना का मुहूर्त

कलश स्थापना सूर्योदय से पूर्व ऊषाकाल में या फिर अभिजित मुहूर्त दिन में साढ़े ग्यारह बजे से साढ़े बारह बजे तक सम्पन्न किया जा सकता । मिट्टी या पीतल का कलश, मां दुर्गा की मूर्ति, एक चौकी, 7 तरह के अनाज, जौ, लाल या पीले रंग के कपड़े, आम के पत्ते, लाल रंग के फूल, माला, श्रृंगार की वस्तुए आदि। 

 विशेष रूप से हर व्यक्ति को इस बात का व्रत संकल्प लेना चाहिए कि मैं नौ दिन तक किसी भी आत्मा को कष्ट नहीं पहुचाऊंगा और सत्य का पालन करूंगा। हमारे शरीर से मन से वचन से एवं हमारे कर्म से किसी भी प्राणी का अहित नहीं होने दूंगा। 

नवरात्र में किस दिन किस देवी की होगी पूजा

 22 सितंबर-प्रथम दिवस- मां शैलपुत्री
23 सितंबर-द्वितीय दिवस- मां ब्रह्मचारिणी
24 सितंबर तृतीय दिवस- मां चंद्रघंटा
25 सितंबर तृतीय दिवस-मां चंद्रघंटा
26 सितंबर-चतुर्थ दिवस- मां कूष्माण्डा
27 सितंबर-पंचम दिवस- मां स्कंदमाता
28 सितंबर-षष्ठम दिवस-मां कात्यायनी
29 सितंबर-सप्तम दिवस- मां कालरात्रि
30 सितंबर-अष्टमी दिवस- मां महागौरी/ सिद्धिदात्री
01 अक्टूबर-नवम दिवस-मां सिद्धिदात्री
02 अक्टूबर-व्रत पारण/दशहरा

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